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मीनाक्षी हुड्डा ने वर्ल्ड बॉक्सिंग कप में रचा इतिहास, 48 किलोग्राम वर्ग में जीता गोल्ड; प्रीति पवार ने भी दिलाया भारत को स्वर्ण

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विश्व मुक्केबाजी कप के फाइनल मुकाबलों में भारत की दो युवा महिला बॉक्सर—मीनाक्षी हुड्डा और प्रीति पवार—ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीतकर देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। 48 किलोग्राम वर्ग में मीनाक्षी हुड्डा ने अपने दमदार खेल के दम पर उज्बेकिस्तान की फोजिलोवा फरजोना को 5-0 से हराते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले की शुरुआत से ही मीनाक्षी ने अपनी आक्रामक रणनीति से बढ़त बना ली थी, जिसे उन्होंने अंतिम राउंड तक बनाए रखा। जजों ने सर्वसम्मति से उन्हें विजेता घोषित किया।

मीनाक्षी हुड्डा की स्वर्णिम जीत
जीत के बाद मीनाक्षी ने कहा कि भारत में आयोजित इस टूर्नामेंट में खेलना उनके लिए बेहद खास था। उन्होंने बताया कि वे पूरी तैयारी और देश के लिए जीतने के इरादे के साथ रिंग में उतरी थीं। “मैंने हर मुकाबला 5-0 से जीता। आप सभी के समर्थन के लिए धन्यवाद। वर्ल्ड चैंपियन बनना आसान है, लेकिन शीर्ष पर बने रहना बहुत चुनौतीपूर्ण है,” उन्होंने कहा। उनका यह स्वर्ण पदक न केवल उनकी मेहनत का परिणाम है, बल्कि उनके निरंतर आत्मविश्वास और समर्पण का भी प्रमाण है।

हरियाणा के रुड़की गांव में 2 अगस्त 2001 को जन्मी मीनाक्षी ने 12 साल की उम्र में बॉक्सिंग की ट्रेनिंग शुरू की थी। उनकी प्रतिभा जल्द ही सामने आने लगी। 2019 में उन्होंने यूथ नेशनल्स में गोल्ड जीता और 2021 में सीनियर नेशनल्स में रजत पदक हासिल किया। 2022 एशियन चैंपियनशिप में उन्होंने सिल्वर जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी ताकत दिखाई। लगातार शानदार प्रदर्शन के कारण उन्हें भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में नौकरी भी मिली, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया।

प्रीति पवार ने 54 किलोग्राम वर्ग में जीता स्वर्ण
भारत की एक और उभरती खिलाड़ी प्रीति पवार ने भी 54 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने इटली की सिरीन चाराबी को 5-0 से मात दी। चोट और खराब फॉर्म से जूझने के बाद प्रीति ने शानदार वापसी की है। जीत के बाद उन्होंने कहा, “मैंने खुद को फिर से साबित किया है और अब पहले से भी ज्यादा मजबूत हूं। आने वाले टूर्नामेंट्स में मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करूंगी।”

प्रीति का अगला लक्ष्य आने वाले एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल और 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक हैं। वह इन प्रतियोगिताओं में भारत के लिए और अधिक पदक जीतने के लिए कठोर मेहनत कर रही हैं।

भारत की दोहरी सफलताओं से उत्साह
मीनाक्षी और प्रीति की जीत ने भारतीय मुक्केबाजी में नई ऊर्जा भर दी है। दोनों खिलाड़ियों के स्वर्ण पदक ने यह साबित कर दिया है कि भारत की युवा पीढ़ी वैश्विक मंच पर देश का नाम रोशन करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

Correspondent – Shanwaz Khan

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