पटना:
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुक्रवार को समाप्त हो गई। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, 121 विधानसभा सीटों के लिए अब तक 1,250 से अधिक उम्मीदवारों ने अपने नामांकन पत्र दाखिल किए हैं। यह आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है क्योंकि कई जिलों से जानकारी अभी पूरी तरह नहीं आई है।
इस बार सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) आत्मविश्वास से भरे अभियान के साथ मैदान में उतरा है। भाजपा और जद(यू) के बीच 243 सदस्यीय विधानसभा की 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ने को लेकर सहमति बन चुकी है। बची हुई सीटें छोटे सहयोगियों – लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा को दी गई हैं। गठबंधन में तालमेल को लेकर अब तक कोई मतभेद सामने नहीं आया है और एनडीए संयुक्त रूप से चुनाव प्रचार में जुटा है।
वहीं दूसरी ओर, विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इस गठबंधन में राजद, कांग्रेस, तीन वाम दल और मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) शामिल हैं। सीटों के बंटवारे को लेकर अब तक स्पष्टता नहीं आ सकी है, जिसके कारण कई सीटों पर गठबंधन के घटक दलों के उम्मीदवार आमने-सामने हैं।
जानकारी के अनुसार, कम से कम आधा दर्जन सीटों पर इंडिया गठबंधन के एक से अधिक प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया है। यदि इन उम्मीदवारों ने 20 अक्टूबर तक नाम वापस नहीं लिया, तो कई सीटों पर ‘फ्रेंडली फाइट’ की स्थिति बन सकती है।
सीट बंटवारे में असमंजस का उदाहरण जाले सीट पर देखने को मिला, जहां कांग्रेस ने राजद नेता ऋषि मिश्रा को अपने चुनाव चिन्ह पर लड़ने की अनुमति दी है। हालांकि लालगंज सीट पर राजद ने कांग्रेस को ऐसा अवसर नहीं दिया, जहां मुन्ना शुक्ला की पुत्री शिवानी शुक्ला और कांग्रेस के आदित्य कुमार राजा दोनों मैदान में हैं।
वैशाली और कहलगांव में भी राजद और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर की संभावना बन रही है। इसके अलावा कांग्रेस को बछवाड़ा, राजापाकर और रोसेरा सीटों पर वाम दलों से मुकाबला करना पड़ सकता है।
विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) प्रमुख मुकेश सहनी ने इस बार खुद चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया है। 2020 के चुनाव में उनकी पार्टी ने चार सीटें जीती थीं।
पहले चरण के नामांकन के साथ ही बिहार का राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। जहां एनडीए अपने संगठनात्मक सामंजस्य और नेतृत्व पर भरोसा जता रहा है, वहीं इंडिया गठबंधन को अभी भी सीट बंटवारे और उम्मीदवार चयन को लेकर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।



