लोक आस्था और सूर्योपासना का चार दिवसीय महापर्व छठ, आज उगते सूर्य को ‘उषा अर्घ्य’ अर्पित करने के साथ ही हर्षोल्लासपूर्वक संपन्न हो गया। बिहार, झारखंड, और पूर्वी उत्तर प्रदेश सहित देशभर में नदी और तालाब के घाटों पर श्रद्धा और भक्ति का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। भोर की पहली किरण के साथ ही, पारंपरिक परिधानों में सजे लाखों व्रतियों ने कमर तक जल में खड़े होकर सूर्य देव को नमन किया और अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
पटना के प्रमुख घाटों जैसे दीघा, NIT घाट, और कलेक्ट्रेट घाट पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु जुटे। पूरा वातावरण ‘छठ मइया’ के पारंपरिक गीतों और वैदिक मंत्रों से गूंज उठा। औरंगाबाद के ऐतिहासिक देव सूर्य मंदिर में भी देश-विदेश से आए भक्तों का तांता लगा रहा। कई व्रतियों ने कठिन ‘दंड प्रणाम’ करते हुए घाट तक की यात्रा पूरी की, जो उनकी अटूट आस्था का प्रतीक था। इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और चिराग पासवान जैसे कई राजनीतिक हस्तियों ने भी विभिन्न स्थानों पर पूजा-अर्चना कर व्रतियों से मुलाकात की।
इस वर्ष प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी चाक-चौबंद रहीं। घाटों पर सुरक्षा, स्वच्छता, और प्रकाश की उत्तम व्यवस्था की गई थी, ताकि श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो। एक सराहनीय पहल के तहत, कई घाटों की सजावट में “मतदान अवश्य करें” जैसे सामाजिक जागरूकता के संदेशों को भी शामिल किया गया, जो इस पर्व को सामाजिक सरोकारों से जोड़ता है।
सुबह के अर्घ्य के बाद, व्रतियों ने अदरक और गुड़ का प्रसाद ग्रहण कर अपना 36 घंटे का कठोर निर्जला उपवास तोड़ा। ‘छठ मइया की जय’ के जयकारों के बीच लोगों ने एक-दूसरे को बधाई दी और प्रसाद वितरित किया। इस प्रकार, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सामाजिक समरसता का यह महापर्व शांति और उल्लास के साथ अपने समापन पर पहुंचा।



