नीतीश कुमार ने बिहार में फिर इतिहास रचते हुए 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। नई मंत्रिपरिषद में 26 मंत्री शामिल किए गए हैं, जिसमें अनुभव के साथ नए चेहरों को भी जगह मिली है। एनडीए को इस बार विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत मिला है, जिसने राज्य में एक स्थिर सरकार की उम्मीदों को पंख दिए हैं।
ऐतिहासिक दसवां कार्यकाल
मार्च 2000 से मुख्यमंत्री बनने का सफर तय कर चुके नीतीश कुमार अब तक 19 साल से अधिक समय तक राज्य की सत्ता पर रहे हैं। बीच से बस कुछ समय के लिए जीतन राम मांझी को पद संभालना पड़ा, वरना पूरा दौर नीतीश के नाम रहा है। देश में सबसे अधिक बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नेता के तौर पर वे एक नया रिकॉर्ड भी बना चुके हैं।
नई सरकार और इसका महत्व
पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में हुए भव्य समारोह में राज्यपाल ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उनके साथ 26 मंत्रियों ने भी सरकार की जिम्मेदारी संभाली। इस नई कैबिनेट में पुराने अनुभवी नेताओं के साथ-साथ युवाओं और महिलाओं को भी जगह देकर सामाजिक और जातीय संतुलन साधने पर विशेष ध्यान दिया गया है। सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा को डिप्टी सीएम बनाया गया है, जबकि अन्य वरिष्ठ और कुछ नए चेहरों को मंत्रिपरिषद में जगह मिली है।
नीतीश कुमार ने शपथ के बाद अपने संबोधन में राज्य के विकास, कानून-व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, रोजगार और कृषि जैसे क्षेत्रों पर फोकस की बात कही। सरकार की प्राथमिकता गरीबों, युवाओं और महिलाओं के लिए योजनाओं का विस्तार, रोजगार के नए अवसर और आधारभूत ढांचे को और मजबूत करना बताया गया।
जातीय संतुलन और प्रशासनिक अनुभव
नई कैबिनेट में अलग-अलग सामाजिक वर्गों और समुदायों को प्रतिनिधित्व देकर आने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीति संतुलन साधने का प्रयास किया गया है। अनुभवी नेताओं जैसे विजय कुमार चौधरी, श्रवण कुमार, बिजेंद्र प्रसाद यादव और नए चेहरों में श्रेयसी सिंह, लखेंद्र कुमार रोशन की उपस्थिति, सरकार को युवा एवं ऊर्जा से परिपूर्ण बनाती है।
राजनीति में नए दौर की शुरुआत
नीतीश कुमार का 10वां कार्यकाल न केवल उनके व्यक्तिगत नेतृत्व का प्रमाण है, बल्कि बिहार में राजनीतिक स्थिरता और प्रशासनिक कुशलता की उम्मीद भी जगाता है। विश्लेषकों के अनुसार, इस टीम से राज्य को नए विकास पथ पर ले जाने, कानून-व्यवस्था को सुधारने और संसाधनों का बेहतर वितरण किए जाने की अपेक्षा है।
विपक्ष और चुनौतियां
बिहार का राजनीतिक परिदृश्य हाल के वर्षों में कई उठापठक से गुजरा है। नए गठबंधन और चुनावी समीकरणों के चलते सभी की नजरें नीतिगत फैसलों, नई योजनाओं की गति और जनता की अपेक्षाओं पर टिकी हैं। विपक्ष ने नई सरकार की नीति और घोषणाओं की बारीकी से निगरानी शुरू कर दी है; कृषि, युवा कल्याण और सामाजिक कल्याण योजनाओं को लेकर विभिन्न सवाल भी उठाए गए हैं।
भविष्य की राह
अगर नीतीश कुमार अपना कार्यकाल पूरा करते हैं, तो वे पवन चामलिंग (सिक्किम) के सबसे लंबे मुख्यमंत्री कार्यकाल वाले रिकॉर्ड के करीब पहुंच सकते हैं। अर्थव्यवस्था को गति देने, निवेश बढ़ाने, शिक्षा व स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ सामाजिक समावेश और सुशासन की परीक्षा भी इसी कार्यकाल में होगी।
निष्कर्ष
नई सरकार से जनता की अपेक्षाएं बहुत ऊंची हैं। सुशासन, विकास और समाजिक न्याय के एजेंडे पर काम करना नई टीम के लिए चुनौती भी है और अवसर भी। नीतीश कुमार का यह कार्यकाल बिहार की राजनीति को एक नई दिशा देने के लिए मील का पत्थर बन सकता है—इसी पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।
Correspondent – Shanwaz Khan



