नई दिल्ली, 26 नवंबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को संविधान दिवस के अवसर पर नागरिकों से अपील की कि वे अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन करें, क्योंकि यही एक सशक्त लोकतंत्र की मज़बूत नींव है। उन्होंने देश के शैक्षणिक संस्थानों से सुझाव दिया कि 18 वर्ष की उम्र पूरी कर पहली बार मतदान करने वाले नागरिकों का सम्मान कर संविधान दिवस मनाया जाए।
पीएम मोदी ने देशवासियों को लिखे पत्र में कहा कि भारत का संविधान केवल अधिकारों का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि कर्तव्यों का स्मरण भी करवाता है। उन्होंने महात्मा गांधी के उस विचार को याद किया कि “अधिकार, कर्तव्यों के निर्वहन से ही प्राप्त होते हैं”। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब नागरिक अपने कर्तव्यों को जिम्मेदारी से निभाते हैं, तभी समाज और राष्ट्र की प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है।
प्रधानमंत्री ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान समय में लिए जा रहे हर निर्णय और नीति भविष्य की पीढ़ियों के जीवन को प्रभावित करेगी। इसलिए यह आवश्यक है कि प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों को सर्वोपरि रखे और ईमानदारी के साथ देश के विकास में योगदान दे। उन्होंने कहा कि भारत आज “विकसित भारत” के विज़न की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसके लिए देशवासियों की सक्रिय भागीदारी ज़रूरी है।
पीएम मोदी ने अपने पत्र में यह भी कहा कि लोकतंत्र का आधार केवल मताधिकार नहीं, बल्कि नागरिकों की जागरूकता और जिम्मेदारी है। मतदान का अधिकार देश के प्रत्येक वयस्क को संविधान ने दिया है, और इस अधिकार का इस्तेमाल करना नागरिकों का पवित्र कर्तव्य है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे मतदान प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर भाग लें और लोकतंत्र को मज़बूत बनाएं।
संविधान दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने लिखा कि संविधान दिवस पर देश हमारे संविधान निर्माताओं को नमन करता है, जिनकी दूरदर्शिता और प्रतिबद्धता ने भारत को लोकतांत्रिक पहचान दी। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान मानवीय गरिमा, समानता और स्वतंत्रता को सर्वोच्च महत्व देता है। यह नागरिकों को अधिकारों से सशक्त करता है, साथ ही उन्हें अपने कर्तव्यों का एहसास भी कराता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान केवल शासन की संरचना तय नहीं करता, बल्कि यह नागरिकों के आचरण का मार्गदर्शक भी है। इसमें निहित मूल्य – न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता – हमारे राष्ट्रीय चरित्र की पहचान हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में इन संवैधानिक मूल्यों को लागू करने का संकल्प लें और समाज में सौहार्द, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करें।
पीएम मोदी ने अंत में कहा कि संविधान दिवस केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि यह अवसर है उन आदर्शों को स्मरण करने का जिन पर देश की नींव रखी गई है। उन्होंने कहा, “आइए हम इस अवसर पर अपने कार्यों के माध्यम से संवैधानिक मूल्यों को सशक्त करने की प्रतिबद्धता दोहराएं और एक ऐसे भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ें जो मानव गरिमा और समानता के सिद्धांतों पर टिका हो।”
संविधान दिवस, जिसे Constitution Day या Law Day भी कहा जाता है, हर वर्ष 26 नवंबर को मनाया जाता है। इसी दिन 1949 में भारत की संविधान सभा ने संविधान को अपनाया था, जो 26 जनवरी 1950 को प्रभाव में आया।
Correspondent – Shanwaz khan



