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भावनगर के अस्पताल कॉम्प्लेक्स में भीषण आग, 20 से अधिक बच्चों को खिड़की से चादर में लपेट कर बचाया गया

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भावनगर के समीप स्थित एक कॉम्प्लेक्स में भीषण आग लग गई, जिसमें करीब 10-15 अस्पताल और ऑफिस शामिल हैं। यह आग इतनी विकराल थी कि अंदर भर्ती मरीजों और खासकर बच्चों की जान-माल को खतरा पैदा हो गया। आग लगने की सूचना मिलते ही फायर डिपार्टमेंट और पुलिस मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया।

इस भीड़-भाड़ वाले कॉम्प्लेक्स में कई अस्पताल और ऑफिस हैं, जिनमें बच्चों का अस्पताल भी शामिल है। आग बिल्डिंग के बेसमेंट में लगी थी, जो पार्किंग के लिए इस्तेमाल होनी चाहिए थी, लेकिन वहां अन्य उपयोग चल रहा था। तेज धुएं और आग की लपटों के बीच, अस्पताल में भर्ती मरीजों खासकर 15 से 20 बच्चों को सुरक्षा के लिए खिड़की तोड़कर बाहर निकाला गया।

स्थानीय लोगों ने खिड़की पर सीढ़ी लगाकर, बच्चों को चादर में लपेट कर सुरक्षित बाहर निकाला। फायर डिपार्टमेंट के आने से पहले ही स्थानीय लोग सक्रिय हो गए और एक-एक कर बच्चों को चादर में लपेटकर बचाया। इस सतर्कता और सूझबूझ के कारण किसी बच्चे की जान नहीं गई।

आग लगते ही अस्पताल में भर्ती मरीजों को तुरंत बचाया गया और उन्हें सर टी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया। प्रशासन की तत्परता और फायर ब्रिगेड की मेहनत से करीब एक घंटे में आग पर काबू पा लिया गया।

हादसे में किसी भी तरह की जनहानि नहीं हुई है, यह बड़े खुशखबरी की बात है। अस्पताल के अंदर फंसे मरीजों और बच्चों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकालकर बड़ी दुर्घटना टली।

यह दुर्घटना एक बार फिर सवाल उठाती है कि इतने बड़े कॉम्प्लेक्स में कई अस्पतालों का होना और बच्चों के अस्पताल का बेसमेंट में होना कितनी सुरक्षित है। आमतौर पर बेसमेंट का इस्तेमाल पार्किंग के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन इस इमारत में इसका गलत उपयोग हुआ।

आग लगने के कारणों की जांच अभी जारी है, और कहा जा रहा है कि यह एक चमत्कार से कम नहीं कि इतनी भीषण आग में कोई हताहत नहीं हुआ। इस घटना से जुड़े कई पहलुओं पर प्रशासन और अग्निशमन विभाग विस्तृत समीक्षा कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

स्थानीय निवासी और प्रशासन इस घटना की तत्काल बाद राहत कार्य और जांच में लगे हुए हैं। इस आग से सावधानी के महत्व को भी स्पष्ट किया गया है कि जैसे-जैसे बड़े अस्पताल और कॉम्प्लेक्स बन रहे हैं, सुरक्षा मानकों पर कड़ाई से अमल और नियमित जांच की जरूरत है।

इस घटना ने यह भी दिखाया कि संकट के समय स्थानीय लोगों की तत्परता, समझदारी और सहयोग कैसे जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

 

Gujrat / Piyush Dhar Diwedi

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