उत्तर प्रदेश के नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, बागपत और हापुड़ जैसे शहरों में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे लोगों की सांस लेना मुश्किल हो गया है। दिल्ली से सटे ये शहर ऑरेंज से डार्क रेड जोन में बने हुए हैं, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक माना जाता है। पिछले एक महीने से यहां की हवा जहरीली बनी हुई है, जिससे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को आंखों में जलन और खांसी जैसी तकलीफें हो रही हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार शुक्रवार 5 दिसंबर को गाजियाबाद का लोनी इलाका प्रदेश का सबसे प्रदूषित क्षेत्र बना रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 381 दर्ज किया गया, जबकि नोएडा के सेक्टर-125 में 367, सेक्टर-116 में 346 और सेक्टर-62 में 286 AQI रहा। ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क-5 में भी प्रदूषण का स्तर 337 तक पहुंच गया है।

हापुड़ में भी हवा की गुणवत्ता बेहद खराब रही, जहां AQI 350 दर्ज किया गया। बागपत में AQI 321, मेरठ के पल्लवपुरम में 287 और बुलंदशहर में 265 रहा। राजधानी लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज और गोरखपुर जैसे शहरों में हवा का प्रदूषण थोड़ा कम है और यहां वायु गुणवत्ता यलो जोन में बनी हुई है, लेकिन फिर भी सांस लेने में आसानी नहीं हो रही।
ये शहर आज गैस चैंबर की तरह महसूस हो रहे हैं, जिससे स्थानीय लोग स्वास्थ्य संबंधी गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। मौसम के इस खराब हालात के चलते विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी प्रदूषण का स्तर कम होने की संभावना नहीं है, जिससे राहत मिलना मुश्किल होगा।
लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे अधिक से अधिक मास्क पहनें और प्रदूषित हवा से बचाव के लिए घर के अंदर ही रहें, खासकर बच्चे, बुजुर्ग और मरीज विशेष सावधानी बरतें। प्रशासन को भी इस प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है, ताकि आम जनता को सांस लेने में राहत मिल सके।
Uttar Pradesh/Ghaziabad-Noida/Piyush Dhar Diwedi



