मध्य प्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के परिवार में नशे के कारोबार से जुड़े मामलों की बढ़ती गिरफ्तारीयों ने प्रदेश की राजनीति में तहलका मचा दिया है। रविवार को खजुराहो में आयोजित एक कार्यक्रम के बाहर जब प्रतिमा बागरी से उनके भाई अनिल बागरी की गांजा तस्करी में गिरफ्तारी पर सवाल किया गया, तो मंत्री तीखी प्रतिक्रिया दे गईं और पत्रकारों को डांट कर वहां से चली गईं। इस घटना ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है, जहां विपक्ष लगातार मंत्री और उनके परिवार पर आरोप लगा रहा है।
प्रतिमा बागरी उस समय मीडिया के सवालों से तमतमा गईं जब पत्रकारों ने पूछा कि आखिर उनके भाई अनिल बागरी को 46 किलो गांजा के साथ गिरफ्तार क्यों किया गया। मंत्री ने जवाब देने के बजाय कहा, “जबरदस्ती की बात क्यों करते हो तुम लोग?” इसके बाद बिना कोई और जवाब दिए वह आगे बढ़ गईं। इस प्रतिक्रिया ने विपक्ष को मौका दे दिया कि वे इसे मंत्री परिवार में नशे के कारोबार की संलिप्तता का सबूत बताएं और सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग करें।
परिवार की गिरफ्तारीयों से बढ़ा विवाद
स्थिति तब और गंभीर हुई जब सतना पुलिस ने अनिल बागरी के अलावा उसके जीजा शैलेंद्र सिंह को भी इस मामले में गिरफ्तार किया। दोनों के खिलाफ नशे की तस्करी का मामला दर्ज है और वे पुलिस की हिरासत में हैं। आरोप है कि ये दोनों संयुक्त रूप से नशे की सप्लाई कर रहे थे। वहीं, यूपी के बांदा जिले में 3 दिसंबर को हुई एक बड़ी कार्रवाई में मंत्री की छोटी बहन के पति शैलेंद्र सिंह सहित पांच लोगों को अंतर्राज्यीय तस्करी गिरोह का हिस्सा मानते हुए पकड़ा गया। पुलिस ने नाइट पेट्रोलिंग के दौरान मुख्य मुखबिर की सूचना पर ये छापेमारी की थी।
प्रतिमा बागरी का राजनीतिक सफर
प्रतिमा बागरी सतना जिले की रैगांव विधानसभा सीट से 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की कल्पना वर्मा को भारी मतों से हराकर विधायक बनीं। इसके बाद उन्हें भाजपा की महिला मोर्चा महामंत्री तथा जिला संगठन मंत्री के पदों पर कार्य करते हुए मंत्री पद मिला। वे मोहन यादव कैबिनेट की सबसे कम उम्र की मंत्री मानी जाती हैं। हालांकि, उनके परिवार के सदस्य लगातार नशे और तस्करी के मामलों में पकड़े जाने के कारण उनकी राजनीतिक छवि पर सवाल उठे हैं।
विपक्ष का तीखा हमला
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर मंत्री के परिवार को घेरते हुए आरोप लगाया कि उनके रिश्तेदार खुलेआम तस्करी के कारोबार में लिप्त हैं। जब मीडिया इस संबंध में सवाल पूछता है, तो मंत्री भड़क जाती हैं और सवालों से बच रही हैं। कांग्रेस ने कहा है कि यह भाजपा सरकार के संरक्षण का परिणाम है, जिसमें सत्ता के नजदीकी लोग कई अवैध गतिविधियों में शामिल हैं। वे इसे सरकार के भ्रष्टाचार और दबंगई का उदाहरण बताते हैं।
राजनीतिक माहौल गर्म
यह मामला प्रदेश के राजनीतिक वातावरण को खासा गर्मा रहा है। विपक्ष इसे आगामी चुनावों के संदर्भ में बड़ा मुद्दा बनाना चाहता है, जबकि सरकार ने फिलहाल मामला जांच के लिए पुलिस पर छोड़ दिया है। स्थानीय लोगों की नजर में भी यह मुद्दा संवेदनशील बन गया है क्योंकि इससे न केवल मंत्री परिवार की छवि प्रभावित हुई है, बल्कि प्रदेश की राजनीतिक स्थिरता पर भी असर पड़ा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि मंत्री खुद इस स्थिति को पारदर्शी ढंग से संभालती हैं और जांच में सहयोग करती हैं, तो विवाद साल भर चलेगा। लेकिन मौजूदा नाराजगी और प्रतिक्रिया से स्थिति और बिगड़ सकती है, जिससे उनकी और भाजपा की छवि दोनों प्रभावित होंगी।
इस बीच, सतना सहित आस-पास के जिले इस मामले की लगातार खबरों से जुड़ी चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। हर कोई जानना चाहता है कि सरकार इस घटना को कितनी गंभीरता से लेगी और आगामी कार्रवाई क्या होगी।
MP / Piyush Dhar Diwedi



