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सिद्धारमैया बनाम शिवकुमार: क्या 2.5 साल बाद कर्नाटक को नया मुख्यमंत्री मिलेगा? हाईकमान पर टिकीं निगाहें

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कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच ‘2.5-2.5 साल के पावर शेयरिंग फॉर्मूले’ को लेकर खींचतान गहराती जा रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने विधानसभा में स्पष्ट कर दिया है कि ऐसा कोई समझौता हुआ ही नहीं था और वह अपना पूरा कार्यकाल पूरा करेंगे।

शुक्रवार को विधानसभा में बोलते हुए सिद्धारमैया ने कहा, “मैं पहले भी पांच साल का कार्यकाल पूरा कर चुका हूं और इस बार भी पूरा कार्यकाल मुख्यमंत्री रहूंगा। किसी तरह का 2.5 साल का समझौता नहीं हुआ था।” यह इस सप्ताह का दूसरा मौका था जब उन्होंने सार्वजनिक तौर पर अपनी मंशा साफ की कि वह पूरा कार्यकाल मुख्यमंत्री बने रहेंगे।

समझौते की कहानी कहां से शुरू हुई

दरअसल, मई 2023 में जब कांग्रेस ने कर्नाटक में प्रचंड बहुमत से जीत हासिल की थी, तब मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और प्रदेश कांग्रेस प्रमुख डीके शिवकुमार के बीच जबरदस्त रस्साकशी चली थी। तब खबरें आई थीं कि “दोनों नेताओं के बीच पार्टी हाईकमान ने अनौपचारिक समझौता कराया है” जिसके तहत सिद्धारमैया पहले आधे कार्यकाल यानी 2.5 साल मुख्यमंत्री रहेंगे, जबकि शेष अवधि के लिए डीके शिवकुमार को अवसर मिलेगा।

अब जब सिद्धारमैया सरकार अपने कार्यकाल के लगभग आधे पड़ाव पर पहुँच चुकी है, शिवकुमार गुट में बदलाव की मांग उठने लगी है। पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि शिवकुमार के समर्थक अप्रैल 2026 के आसपास नेतृत्व परिवर्तन चाहते हैं, जबकि सिद्धारमैया समर्थक पूरे कार्यकाल को उनके नाम पूरा करना चाहते हैं और 2028 के विधानसभा चुनाव में शिवकुमार को आगे बढ़ाने का सुझाव दे रहे हैं।

डिनर मीटिंग से बढ़े सियासी संकेत

इस राजनीतिक खींचतान के बीच गुरुवार रात मंत्री सतीश जरकीहोली के घर एक अहम डिनर मीटिंग हुई, जिसमें सिद्धारमैया, गृह मंत्री जी. परमेश्वर और कई वरिष्ठ मंत्री शामिल थे। इस बैठक में डीके शिवकुमार को आमंत्रित नहीं किया गया। शिवकुमार ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “डिनर करना कोई गलत बात नहीं, वे करें तो खुशी की बात है।” उनके इस बयान से तनाव छिपा नहीं, बल्कि और जाहिर हो गया।

हाईकमान करेगा अंतिम फैसला

अब पूरा मामला कांग्रेस हाईकमान के दरबार में है। दिल्ली में कुछ विधायकों ने आलाकमान से हस्तक्षेप की मांग की है। सूत्र बताते हैं कि पार्टी ने दोनों नेताओं से “एकता दिखाने” और सरकार के कामकाज पर ध्यान देने के लिए कहा है। कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल किसी भी नेतृत्व परिवर्तन से बचना चाहता है, खासकर जब लोकसभा चुनाव और कई स्थानीय निकाय चुनाव नजदीक हैं।

पार्टी मानती है कि अभी बदलाव से वोक्कालिगा और अहिंदा (दलित, पिछड़ा, अल्पसंख्यक) वोट बैंक में विभाजन की आशंका बढ़ सकती है। इसलिए फिलहाल सिद्धारमैया को समर्थन बरकरार रखा गया है।

सियासी संतुलन की जद्दोजहद

डीके शिवकुमार लगातार संगठन और वित्तीय प्रबंधन में अपनी भूमिका मजबूत कर रहे हैं, वहीं सिद्धारमैया अपने शासन अनुभव और सामाजिक समीकरणों को साधे हुए हैं। दोनों के बीच यह प्रतिस्पर्धा कांग्रेस के लिए वरदान और चुनौती दोनों साबित हो सकती है — क्योंकि अगर आपसी मतभेद बढ़े, तो आगामी चुनावों में इसका असर साफ दिख सकता है।

कुल मिलाकर, कर्नाटक की राजनीति फिलहाल इस सवाल पर टिकी है कि क्या ढाई साल बाद कांग्रेस नेतृत्व सत्ता संतुलन बदलेगा, या सिद्धारमैया 2028 तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे। राज्य की जनता और पार्टी दोनों की निगाहें अब हाईकमान के फैसले पर हैं।

Correspondent – Shanwaz khan

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