नागपुर नगर निगम चुनाव से पहले महा विकास आघाड़ी (एमवीए) में दरार खुलकर सामने आ गई है। एमवीए के घटक दल कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के बीच सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बन सकी है। नतीजतन, दोनों दल अब नागपुर नगर निगम चुनाव अलग-अलग लड़ेंगे। निगम में कुल 151 वार्ड हैं और यहां पिछले तीन चुनावों से भारतीय जनता पार्टी का दबदबा रहा है।
शरद पवार गुट की नागपुर इकाई के अध्यक्ष दुनेश्वर पेठे ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं के साथ सोमवार रात तक बातचीत चलती रही, लेकिन बाद में उनके फोन कॉल का जवाब मिलना बंद हो गया। पेठे के मुताबिक, इससे यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस गठबंधन नहीं करना चाहती।
‘सीटों की मांग पर नहीं बनी बात’
पेठे ने बताया कि एनसीपी (एसपी) ने शुरुआत में 25 सीटों की मांग की थी, लेकिन बातचीत आगे बढ़ाने के लिए 15 सीटों पर चुनाव लड़ने को तैयार हो गई। इसके बावजूद कांग्रेस ने इस मांग को नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि कांग्रेस जानबूझकर हमारे साथ गठबंधन नहीं करना चाहती। इससे बीजेपी को सीधा फायदा पहुंच सकता है।”
एनसीपी (एसपी) नेताओं का मानना है कि यदि एमवीए एकजुट होकर चुनाव लड़ता, तो बीजेपी को कड़ी चुनौती दी जा सकती थी। हालांकि, सीट बंटवारे पर सहमति न बन पाने से विपक्षी वोटों के बंटने की आशंका बढ़ गई है।
2017 के नतीजे और बीजेपी का दबदबा
नागपुर नगर निगम में बीजेपी का रिकॉर्ड मजबूत रहा है। 2017 के चुनाव में 151 सदस्यीय निगम में बीजेपी ने 108 सीटों पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस को 28 सीटें मिली थीं, जबकि बहुजन समाज पार्टी को 10 सीटें, शिवसेना (अविभाजित) को दो और एनसीपी (अविभाजित) को एक सीट से संतोष करना पड़ा था।
इतिहास पर नजर डालें तो 2002 में कांग्रेस ने यहां जीत दर्ज की थी, लेकिन 2007 से लगातार बीजेपी यहां सत्ता में बनी हुई है। 2007, 2012 और 2017—तीनों चुनावों में बीजेपी ने बहुमत हासिल किया।
मतदान प्रतिशत और चुनावी कार्यक्रम
नागपुर में मतदान प्रतिशत में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 2002 में 49.07 फीसदी मतदान हुआ था, जो 2007 में बढ़कर 56.28 फीसदी हो गया। 2012 में यह घटकर 52 फीसदी और 2017 में 53.72 फीसदी दर्ज किया गया।
महाराष्ट्र में कुल 29 नगर निगम हैं। इन नगर निगमों के चुनाव 15 जनवरी को होंगे और अगले दिन मतगणना की जाएगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि आज है, जबकि 2 जनवरी तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। उम्मीदवारों की अंतिम सूची 3 जनवरी को जारी होगी।
नागपुर में एमवीए का अलग-अलग चुनाव लड़ने का फैसला राजनीतिक समीकरणों को बदल सकता है, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलने की संभावना जताई जा रही है।
Corrospondent – Shanwaz khan



