महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने 13 नगर निगमों में 125 पार्षदों (कॉर्पोरेटरों) की जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया। पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस सफलता को ऐतिहासिक बताते हुए साफ कर दिया कि उनकी पार्टी न तो भाजपा के साथ जाएगी और न ही विपक्षी INDIA गठबंधन का हिस्सा बनेगी। ओवैसी ने कहा, “हमारी लड़ाई सत्ता के जोड़-तोड़ के लिए नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों के लिए है जिन्होंने हमें जनादेश दिया है।”
शनिवार (17 जनवरी 2026) को हैदराबाद में मीडिया से बातचीत के दौरान ओवैसी ने इस जीत का पूरा श्रेय पार्टी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को दिया। उन्होंने कहा कि AIMIM अब किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं रही। “अल्लाह का शुक्र है कि हमारे कई हिंदू भाई, जिनमें दलित, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के उम्मीदवार शामिल हैं, AIMIM के टिकट पर जीते। यह हमारी सोशल इंजीनियरिंग की जीत है।” विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति पार्टी को मुस्लिम-प्रधान छवि से बाहर निकालने में सफल रही।
मजबूत पकड़ वाले गढ़ों में AIMIM की धमक
चुनावी नतीजों में AIMIM ने छत्रपति संभाजीनगर (अब औरंगाबाद) में 33 सीटों पर कब्जा जमाया, जहां वह भाजपा के बाद दूसरी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी। सोलापुर में भी पार्टी ने प्रभावी प्रदर्शन किया। मुंबई महानगरपालिका (BMC) में AIMIM को 8 सीटें मिलीं, जो पार्टी की विस्तारवादी रणनीति का प्रमाण है। मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्रों में पार्टी की पैठ गहरी हुई है। कुल 29 नगर निगमों के इन चुनावों को 2029 विधानसभा चुनाव से पहले ‘लिटमस टेस्ट’ माना जा रहा था। AIMIM ने पिछली बार की 56 सीटों को दोगुने से ज्यादा बढ़ाकर 125 पहुंचा दिया, जो राज्य के शहरी निकायों में उसकी बढ़ती ताकत को दर्शाता है।
‘बी-टीम’ आरोपों पर ओवैसी का जोरदार पलटवार
विपक्षी दलों द्वारा लगातार ‘बी-टीम’ (भाजपा की B-टीम) कहे जाने पर ओवैसी ने तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “जो हमें बी-टीम कहते हैं, वे उन लाखों मतदाताओं का अपमान कर रहे हैं जिन्होंने AIMIM को चुना। जनता के जनादेश का अनादर करने वालों का पतन तय है।” गठबंधन की किसी भी संभावना को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने अकोट (Akot) का उदाहरण दिया। ओवैसी ने अपने सभी पार्षदों को सख्त हिदायत दी कि वे भाजपा वाले किसी भी समूह से न जुड़ें। उन्होंने इम्तियाज जलील के उस फैसले का हवाला दिया, जब उन्होंने एक सदस्य को भाजपा समर्थन के लिए सस्पेंड कर दिया था। “पार्टी अनुशासन हमारी प्राथमिकता है।”
पश्चिम महाराष्ट्र में हार पर ईमानदार स्वीकारोक्ति
ओवैसी ने अपनी कमियों को भी स्वीकार किया। एक संपादक के सवाल पर उन्होंने कहा कि पश्चिमी महाराष्ट्र पर पर्याप्त ध्यान न दे पाने का अफसोस है। “अगर वहां ज्यादा समय देते, तो जीत का आंकड़ा और ऊंचा होता।” हारने वाले उम्मीदवारों को प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने जोर दिया, “जीतना कठिन है, लेकिन जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना इससे बड़ी जिम्मेदारी। सभी कॉर्पोरेटर जमीन से जुड़े रहें और सेवा करें।” यह बयान AIMIM की भविष्य रणनीति का संकेत देता है, जहां कमजोर क्षेत्रों पर फोकस बढ़ेगा।
इन चुनावों के जरिए AIMIM ने साबित कर दिया कि वह महाराष्ट्र की सियासत में एक स्वतंत्र ताकत बन चुकी है। न BJP, न INDIA—पार्टी अब जनता के मुद्दों पर केंद्रित रहेगी। राज्य की राजनीति में यह नया समीकरण 2029 के विधानसभा चुनावों को रोचक बना सकता है। ओवैसी की यह जीत न केवल मुस्लिम वोटबैंक को मजबूत करती है, बल्कि दलित-ST समुदायों को जोड़कर पार्टी का आधार विस्तार भी दर्शाती है। राजनीतिक विश्लेषक इसे ‘थर्ड फोर्स’ के उदय के रूप में देख रहे हैं।
Correspondent – Shanwaz khan



