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मुंबई मेयर सस्पेंस: ताज होटल में खाना खाने जा रहे संजय राउत, वहीं रुके शिंदे गुट के पार्षद

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मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव के नतीजों के बाद मेयर पद को लेकर जारी सस्पेंस के बीच मुंबई की राजनीति में होटल पॉलिटिक्स ने जोर पकड़ लिया है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने ताज लैंड्स एंड होटल में खाना खाने जाने का बयान देकर ठाकरे और शिंदे गुटों के बीच तनाव को फिर सुर्खियों में ला दिया। इसी होटल में शिवसेना शिंदे गुट के नवनिर्वाचित पार्षदों को रखा गया है, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

संजय राउत ने कहा, “मैं ताज होटल में खाना खाने जा रहा हूं। इसमें किसी को शक करने की जरूरत नहीं।” उनका यह बयान इसलिए चर्चा में है क्योंकि शिंदे गुट के पार्षदों को इसी लग्जरी होटल में ‘सुरक्षित’ रखा गया है। राउत ने एकनाथ शिंदे पर निशाना साधते हुए कहा कि शिंदे उपमुख्यमंत्री हैं, फिर भी उन्हें अपने पार्षदों के ‘भगाए जाने’ का डर सता रहा है। “यह हास्यजत्रा है। उन्होंने विधायकों को तोड़ा, अब नगरसेवकों को होटल में बंद रखना पड़ रहा है। पहले सूरत ले गए थे, अब ताज होटल,” राउत ने व्यंग्य किया।

शिंदे गुट के पार्षद ‘कोंड’ क्यों?

राउत के मुताबिक, शिंदे गुट के 29 पार्षदों को होटल में रखना मराठी अस्मिता का ‘कोंडमारा’ है। उन्होंने कहा, “शिंदे बीजेपी का अंगवस्त्र बन चुके हैं। अमित शाह उनके सरदार हैं। वे शाह के पास जाकर मांग करें, लेकिन देवेंद्र फडणवीस उनकी नहीं सुनेंगे।” राउत ने दावा किया कि बीजेपी मेयर बनाना चाहती है, लेकिन शिवसेना के पार्षद इससे सहमत नहीं। “नए चेहरे शिवसैनिक हैं। आज संचार के साधन इतने हैं कि संदेश कहीं भी पहुंच जाता है। भगवान की इच्छा हुई तो शिवसेना का ही मेयर बनेगा।”

‘महापौर असली शिवसेना का, डुप्लीकेट का नहीं’

संजय राउत ने साफ कहा कि महापौर पद असली शिवसेना (यूबीटी) का होना चाहिए, न कि ‘डुप्लीकेट शिवसेना’ का, जो अमित शाह की सेना है। “पर्दे के पीछे बहुत कुछ चल रहा है। हम नजर रखे हैं। बहुमत चंचल होता है, इधर-उधर जा सकता है। अगर महायुति का मेयर ही बनना था, तो पार्षदों को कोंडने की क्या जरूरत?” उन्होंने महायुति नेता देवाभाऊ को चुनौती दी। राउत ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे की जन्मशताब्दी पर शिवसेना का मेयर जरूर बनेगा।

राज ठाकरे-उद्धव की भूमिका, मराठी एकजुटता पर जोर

राउत ने राज ठाकरे के महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसेना) को कम सीटें मिलने पर दुख जताया। “राज साहेब को 6 सीटें मिलीं, दुख है। हमने एकजुट होने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। राज ठाकरे ने उद्धव ठाकरे को फोन किया। उनकी भूमिका मराठी लोगों को एकजुट करने की थी। शिवसेना की 65 और मनसेना की 6 सीटें अपनी हैं। हमें पार्षदों को छिपाने की जरूरत नहीं पड़ी।” शिंदे ने मुंबई बीजेपी को सौंप दी, लेकिन इससे किसी को फर्क नहीं पड़ेगा, राउत ने कहा।

कांग्रेस पर सफाई, फडणवीस के दावोस दौरे पर तंज

कांग्रेस के वोट विभाजन पर राउत ने कहा, “कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है, स्वतंत्र फैसले लेती है। इसका फायदा बीजेपी को हुआ, लेकिन आगे वे हमारे साथ हैं। मुंबई में उनकी ताकत है, उनकी सीटें बीजेपी के खिलाफ हमारे साथ।” देवेंद्र फडणवीस के दावोस दौरे पर तंज कसते हुए बोले, “वे जाते हैं, लेकिन निवेश नहीं आता। चुनाव से पहले ही दिखता है। क्या फडणवीस को मंजूर होगा कि अमित शाह की पार्टी का मेयर बने?”

बीएमसी चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) को 65, शिंदे गुट को 29, बीजेपी को मजबूत संख्या मिली। मेयर चुनाव में महायुति का पलड़ा भारी है, लेकिन राउत का दावा है कि कई पार्षद ‘असली शिवसेना’ के साथ हैं। राजनीतिक हलकों में सस्पेंस बरकरार है। क्या ताज होटल की ‘राजनीति’ मेयर रेस का रंग बदल देगी? नजरें ठाकरे गुट पर टिकी हैं।

Correspondent – Shanwaz Khan

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