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शंकराचार्य से मुलाकात के बाद पूर्व एसडीएम अलंकार अग्निहोत्री का धमाकेदार ऐलान: ‘7 फरवरी से दिल्ली में आंदोलन, एससी-एसटी एक्ट वापस लो वरना…’

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बरेली, 2 फरवरी 2026: यूजीसी गाइडलाइंस और शंकराचार्य विवाद के विरोध में एसडीएम पद से इस्तीफा देने वाले पूर्व अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने रविवार को वाराणसी पहुंचकर जगतगुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से महत्वपूर्ण मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने एससी-एसटी एक्ट के भयानक दुरुपयोग पर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए बड़ा ऐलान किया। एबीपी न्यूज को दिए विशेष बयान में अग्निहोत्री ने कहा कि यदि 6 फरवरी तक सरकार ने यह काला कानून वापस नहीं लिया, तो 7 फरवरी से दिल्ली कूच कर आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।

अलंकार अग्निहोत्री ने एससी-एसटी एक्ट को ‘देश की आत्मा को खराब करने वाला कानून’ करार देते हुए कहा कि इसका 95 प्रतिशत दुरुपयोग हो रहा है। ये एक ऐसा हथियार बन गया है, जिससे किसी भी व्यक्ति को बिना सोचे-समझे जेल की हवा खिलाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि ज्यादातर केस फर्जी होते हैं, जहां केवल तहरीर के आधार पर लाखों रुपये वसूले जाते हैं। आरोपी पर मानसिक उत्पीड़न का बोझ इतना भारी होता है कि कोई बचाव का रास्ता नहीं बचता। लखनऊ में फर्जी मामलों का डेटा इकट्ठा कर वे जल्द ही बड़ा जनजागरण अभियान छेड़ेंगे, ताकि समाज को इस कानून की कड़वी सच्चाई से रूबरू कराया जा सके।

केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए अग्निहोत्री ने दावा किया कि वर्तमान NDA सरकार अल्पमत में आ चुकी है। संसद सत्र के बीच यूजीसी के नए बिल ने जनता को और भड़का दिया है। 85 प्रतिशत जनरल और ओबीसी वर्ग इस बिल को खत्म करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “यूजीसी नियमों ने देश की कमर तोड़ दी है और भारत की सांस्कृतिक आत्मा पर सीधा हमला बोला है। शंकराचार्य विवाद ने सरकार को पूरी तरह घेर लिया है। बड़ी संख्या में लोग नाराज हैं, और अब समय आ गया है कि सरकार सुने या फिर जनाक्रोश का सामना करे।”

अलंकार अग्निहोत्री का यह ऐलान बरेली से इस्तीफे के बाद उनकी राजनीतिक सक्रियता का नया अध्याय खोलता है। उन्होंने यूपी और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार और पक्षपात बढ़ गया है। शंकराचार्य से मुलाकात के बाद उनका उत्साह दोगुना हो गया है। यदि सरकार ने 6 फरवरी तक एससी-एसटी एक्ट में संशोधन या वापसी नहीं की, तो 7 फरवरी से दिल्ली में धरना-प्रदर्शन शुरू हो जाएगा। यह आंदोलन न केवल कानूनी सुधार की मांग करेगा, बल्कि यूजीसी नीतियों के खिलाफ भी आवाज बुलंद करेगा। राजनीतिक गलियारों में इस ऐलान की खूब चर्चा हो रही है, और विशेषज्ञों का मानना है कि यह सरकार के लिए बड़ा संकट बन सकता है।

Correspondent – Shanwaz Khan

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