देश की सुरक्षा में चार साल तक कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने वाले अग्निवीरों के भविष्य को लेकर लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता के बाद अब एक नई उम्मीद की किरण जगी है। केंद्र सरकार अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए इन बहादुर युवाओं के लिए एक व्यापक एडजस्टमेंट नीति लागू करने की दिशा में तेजी से कदम उठा रही है। खासकर गृह मंत्रालय अर्धसैनिक बलों (CAPF) में इन युवाओं को बड़े पैमाने पर समायोजित करने की योजना बना रहा है। अगर यह नीति अमल में आती है, तो हजारों अग्निवीरों का करियर सुरक्षित हो जाएगा और वे राष्ट्र सेवा की इस पवित्र परंपरा को आगे बढ़ा सकेंगे।
अग्निपथ योजना की शुरुआत जून 2022 में हुई थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को छोटी अवधि की सैन्य सेवा का सुनहरा अवसर प्रदान किया। इस योजना के तहत भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में चार साल के लिए युवाओं की भर्ती शुरू हुई। पहली भर्ती सितंबर 2022 में संपन्न हुई, जिसमें 60,000 से अधिक युवा अग्निवीर बने। योजना के नियमों के अनुसार, इनमें से केवल 25 प्रतिशत को ही स्थायी कमीशन मिलेगा, जबकि शेष 75 प्रतिशत यानी लगभग 46,000 अग्निवीर इस साल के अंत तक अपनी सेवा समाप्त कर रिटायर हो जाएंगे। इन्हें ‘सेवा निधि’ के रूप में कुछ आर्थिक सहायता तो मिलेगी, लेकिन ग्रेच्युटी या पेंशन जैसी लंबी अवधि की सुविधाएं नहीं। ऐसे में इन युवाओं के रोजगार की चिंता स्वाभाविक थी, जो विपक्षी दलों और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच बहस का विषय बनी रही।
अब रिटायरमेंट की घड़ी नजदीक आते ही केंद्र सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से ले लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गृह मंत्रालय ने CAPF के शीर्ष अधिकारियों की एक विशेष आंतरिक समिति गठित करने का निर्देश जारी किया है। यह समिति बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी जैसे प्रमुख अर्धसैनिक बलों में अग्निवीरों के समायोजन के लिए रोडमैप तैयार कर रही है। समिति विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है, जैसे कि इन युवाओं के सैन्य प्रशिक्षण, शारीरिक फिटनेस और अनुशासन का अधिकतम उपयोग कैसे किया जाए। उदाहरण के लिए, सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने जनवरी में ही संकेत दिए थे कि नौसेना से रिटायर अग्निवीरों को बंदरगाहों और तटीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तैनात किया जा सकता है। यह बयान सरकार की सोच को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
सूत्रों की मानें तो प्रस्तावित नीति में CAPF की सीधी भर्ती में 50 प्रतिशत सीटें विशेष रूप से अग्निवीरों के लिए आरक्षित की जा सकती हैं। इसके अलावा, भर्ती प्रक्रिया में ऊपरी आयु सीमा में छूट, शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) में रियायत और ट्रेनिंग अवधि में भारी कटौती जैसे लाभ दिए जा सकते हैं। चूंकि अग्निवीरों को पहले से ही उच्च स्तरीय सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त हो चुका है, इसलिए उन्हें जीरो से शुरुआत नहीं करनी पड़ेगी। यह न केवल इन युवाओं के लिए वरदान साबित होगा, बल्कि अर्धसैनिक बलों की दक्षता को भी बढ़ाएगा। मंत्रालय का मानना है कि अग्निवीरों का अनुभव सीमा सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अमूल्य साबित होगा।
केंद्र सरकार के इस प्रयास को राज्य स्तर पर भी समर्थन मिल रहा है। कई राज्य सरकारों ने पूर्व अग्निवीरों को पुलिस विभाग, होम गार्ड, अग्निशमन सेवा और अन्य सुरक्षा इकाइयों में प्राथमिकता देने की घोषणा कर दी है। उदाहरणस्वरूप, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने पुलिस भर्ती में कोटा आरक्षित करने का वादा किया है। इससे साफ झलकता है कि अग्निवीरों को मुख्यधारा में बनाए रखने की इच्छा राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हो रही है। विपक्ष ने शुरू में योजना पर सवाल उठाए थे, लेकिन अब यह नीति उनके आलोचनाओं का भी प्रभावी जवाब साबित हो सकती है।
आंतरिक समिति अपनी रिपोर्ट मार्च तक गृह मंत्रालय को सौंपने की तैयारी में है। उसके बाद केंद्र सरकार मार्च-अप्रैल 2026 तक आधिकारिक घोषणा कर सकती है, ताकि पहले बैच के रिटायरमेंट से पहले सब कुछ स्पष्ट हो जाए। यह कदम न केवल अग्निवीरों के लिए रोजगार का द्वार खोलेगा, बल्कि युवाओं में सशस्त्र बलों के प्रति उत्साह भी बढ़ाएगा। अग्निपथ योजना का मूल उद्देश्य ही युवा ऊर्जा को राष्ट्र सेवा से जोड़ना था, और यह नई नीति उसी दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। देशवासियों को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इस ऐतिहासिक फैसले को मूर्त रूप देगी, जिससे हजारों परिवारों का भविष्य संवर जाएगा।
Correspondent – Shanwaz Khan



