सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ दायर याचिकाओं पर महत्वपूर्ण सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लिया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद कोर्ट में पेश होकर दलीलें दीं। उन्होंने SIR प्रक्रिया को राजनीतिक साजिश करार दिया।
SIR क्या है और क्यों विवाद?
चुनाव आयोग ने 2026 विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट को अपडेट करने के लिए SIR शुरू किया। इसका उद्देश्य फर्जी वोटरों को हटाना और सूची को शुद्ध बनाना है। लेकिन TMC का आरोप है कि इससे 1.25 करोड़ वैध मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से काटे जा रहे हैं। ममता ने कहा कि चुनाव से ठीक पहले यह जल्दबाजी राजनीतिक लाभ के लिए है। उन्होंने बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) पर दबाव के कारण मानसिक तनाव तक की बात कही। कोर्ट में उन्होंने कपिल सिब्बल और अन्य वरिष्ठ वकीलों के साथ पक्ष रखा।
कोर्ट के निर्देश और चुनाव आयोग का पक्ष
कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। CJI सूर्यकांत ने ECI से कहा कि नाम की स्पेलिंग में मामूली गलती पर “तार्किक विसंगति” बताकर नोटिस न जारी करें। कोर्ट ने वृद्ध, दिव्यांग मतदाताओं के प्रति संवेदनशीलता बरतने पर जोर दिया। ECI ने सफाई दी कि SIR संवैधानिक प्रक्रिया है, 99% फॉर्म वितरित हुए और केवल फर्जी नाम हटाए जा रहे। आयोग ने वोटर डिलीशन के आरोपों को राजनीति बताकर खारिज किया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
TMC ने इसे “वोट चोरी” का हथकंडा बताया। ममता ने कहा, “न्याय के दरवाजे पर रोया जा रहा है।” बीजेपी ने समर्थन किया, कहा SIR पारदर्शिता लाएगा। कांग्रेस ने भी पहले बिहार SIR से जोड़कर सुनवाई की मांग की थी। यह मामला बिहार, तमिलनाडु जैसे राज्यों से जुड़ गया है।
संभावित प्रभाव
2026 बंगाल चुनाव से पहले फैसला अहम होगा। यदि SIR रुका, तो वोटर लिस्ट पर सवाल उठेंगे। कोर्ट अगली सुनवाई में ECI का हलफनामा मांगेगा। यह लोकतंत्र की मजबूती का टेस्ट है।
Bengal- Piyush Dhar Diwedi



