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‘तुम्हारी शादी कब होगी?’ सवालों से तंग आकर 30 साल के युवक ने 20 मंजिला इमारत से कूदकर दी जान

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हैदराबाद, 9 फरवरी 2026: तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के अत्तापुर इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। 30 वर्षीय प्रवीण ने शादी न होने के कारण मानसिक तनाव में आकर 20 मंजिला इमारत से कूदकर आत्महत्या कर ली। रविवार दोपहर यह हादसा हुआ, जिसमें प्रवीण की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

प्रवीण लंबे समय से डिप्रेशन से जूझ रहे थे। उम्र बढ़ने के साथ रिश्ते तय न होने से वे खुद को अकेला और असफल महसूस करने लगे थे। परिवार और दोस्तों की शादियां देखकर उनका दर्द और गहरा हो गया। रोजाना सुनने वाले सवाल—’तुम्हारी शादी कब होगी?’—ने उनके मानसिक दबाव को चरम पर पहुंचा दिया। पिछले कुछ दिनों से वे बेहद परेशान थे, बातचीत कम कर दी थी और अकेले रहना पसंद करने लगे थे। आखिरकार, इसी तनाव में उन्होंने यह कदम उठा लिया।

पुलिस के अनुसार, प्रवीण अपार्टमेंट में अकेले रहते थे। रविवार दोपहर वे चुपचाप 20वीं मंजिल पर पहुंचे और नीचे कूद गए। गंभीर चोटों के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। सूचना मिलते ही अत्तापुर पुलिस मौके पर पहुंची, शव को कब्जे में लिया और परिजनों को सूचित किया। प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की पुष्टि हो चुकी है। परिवार ने बताया कि प्रवीण नौकरी तो कर रहे थे, लेकिन वैवाहिक जीवन न सुलझने से निराश हो गए थे। पुलिस सुसाइड नोट या अन्य सुरागों की तलाश कर रही है।

यह घटना समाज में बढ़ते मानसिक स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा करती है। खासकर युवाओं में शादी का दबाव एक बड़ी समस्या बन रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पारिवारिक अपेक्षाएं और सामाजिक तुलना डिप्रेशन का प्रमुख कारण हैं। ऐसी स्थिति में समय रहते मदद लेना जरूरी है। अगर आप या कोई जानकार डिप्रेशन, चिंता या आत्महत्या के विचारों से जूझ रहा है, तो तुरंत सहायता लें।

मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन नंबर (24×7 मुफ्त सेवाएं):

  • Tele-MANAS (केंद्र सरकार): 14416 या 1800-891-4416—तुरंत काउंसलिंग उपलब्ध।
  • रोशनी (हैदराबाद): 040-66202000 / 040-66202001—डिप्रेशन विशेषज्ञ।
  • आसरा: 98204 66726—आत्महत्या रोकथाम।
  • वनलाइफ: 78930 78930—तत्काल सहायता।

अकेले न रहें—परिवार, दोस्तों से बात करें। मनोचिकित्सक से इलाज कराएं। डिप्रेशन इलाज योग्य बीमारी है। खतरे की स्थिति में 100 (पुलिस) या 108 (एम्बुलेंस) कॉल करें। जागरूकता ही इसे रोक सकती है।

Correspondent – Shanwaz Khan

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