नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में हालिया प्रदर्शन के मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सभी 14 प्रदर्शनकारी छात्रों को 25 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत याचिका मंजूर कर ली है। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की कड़ी मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए छात्रों को राहत प्रदान की।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान 14ों आरोपियों को पेश किया गया था। दिल्ली पुलिस की ओर से विशेष लोक अभियोजक ने तर्क दिया कि जांच को आगे बढ़ाने के लिए आरोपियों की हिरासत जरूरी है। पुलिस ने अदालत को बताया कि जेएनयू छात्रों ने बिना किसी अनुमति के करीब 300 लोगों का जुलूस इंडिया गेट की ओर निकाला था। जब पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोका, तो प्रदर्शनकारियों ने कथित रूप से धक्का-मुक्की की, पुलिस अधिकारियों पर हमला बोला और हिंसा की। पुलिस का दावा है कि यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन कतई नहीं था, बल्कि हिंसक घटना थी। इसमें कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए।
पुलिस ने आगे कहा कि आरोपी छात्र पहले भी कई बार प्रदर्शनों के दौरान बल प्रयोग कर चुके हैं। उनके खिलाफ चार अलग-अलग एफआईआर पहले से दर्ज हैं। दिल्ली पुलिस ने जोर देकर कहा कि ऐसे तत्वों को जमानत देकर जांच प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
दूसरी ओर, आरोपियों के वकीलों ने मजबूत बचाव किया। उन्होंने कहा कि सभी छात्र जांच में पूर्ण सहयोग करने को तैयार हैं और इसके लिए अदालत को लिखित आश्वासन (अंडरटेकिंग) देने को भी राजी हैं। वकीलों ने पुलिस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा था।
सुनवाई के दौरान एक महिला छात्रा ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि चार-पांच बिना वर्दी वाले लोग भीड़ से उन्हें जबरन खींच ले गए, जिससे उनके हाथ पर गहरी चोट आई और खून के थक्के बन गए। इस बयान ने कोर्ट में सनसनी फैला दी।
जेएनयू प्रदर्शन का यह मामला देशव्यापी चर्चा का विषय बना हुआ है। छात्र संगठन इसे अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का केस बता रहे हैं, जबकि पुलिस इसे कानून-व्यवस्था के खिलाफ साजिश करार दे रही है। कोर्ट के इस फैसले से छात्रों में खुशी की लहर है, लेकिन पुलिस ने जमानत शर्तों का सख्ती से पालन कराने का ऐलान किया है। आगे की सुनवाई में और खुलासे हो सकते हैं। यह फैसला छात्र आंदोलनों पर कानूनी नजरिए को नई दिशा दे सकता है।
Correspondent – Shanwaz Khan



