बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में फांसी की सजा सुनाई है। यह फैसला बांग्लादेश में हुए भीषण विरोध-प्रदर्शनों, हिंसा और कई हत्याओं के आरोपों के आधार पर दिया गया है। ट्रिब्यूनल ने हसीना के खिलाफ पांच गंभीर आरोपों में उन्हें मुख्य साजिशकर्ता व जिम्मेदार माना है।
मामले के पीछे की पृष्ठभूमि
साल 2024 में आरक्षण नीति के खिलाफ छात्रों के बड़े आंदोलनों के दौरान बांग्लादेश में 46 दिनों तक जबरदस्त विरोध-प्रदर्शन हुए थे, जिसमें करीब 1400 लोगों की मौत हुई थी। आरोप है कि सुरक्षा बलों व सत्तारूढ़ अवामी लीग के कार्यकर्ताओं ने शेख हसीना के आदेश पर हिंसा और हत्याएं कीं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में भी अधिकांश मौतों के लिए सरकारी कार्रवाई को जिम्मेदार ठहराया गया है।
कोर्ट में लगे आरोप
इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि:
- शेख हसीना ने विरोधियों के खिलाफ प्रतिशोध और बदले की भावना से हत्याओं व अत्याचारों के आदेश दिए
- ड्रोन्स और हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल कर छात्र प्रदर्शनकारियों पर जानलेवा हमला करवाया गया
- एक छात्र की हत्या का आदेश व्यक्तिगत रूप से हसीना ने दिया
- कई जगहों पर निर्दोष प्रदर्शनकारियों को गोली मारने व जलाकर हत्या करने की योजना बनाई गई
फैसले का प्रभाव
फैसले के बाद बांग्लादेश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। शेख हसीना व पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल भारत में निर्वासन में हैं और उनकी गैरहाजिरी में ट्रिब्यूनल ने फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार शेख हसीना को अपील करने का अधिकार नहीं मिलेगा, क्योंकि वह फरार हैं।
हसीना का बयान
शेख हसीना ने फैसले से पहले दिए बयान में कहा, “Allah ने मुझे जीवन दिया, वही ले सकते हैं। मैं अपने लोगों की सेवा करती रहूंगी। ट्रिब्यूनल जो चाहे फैसला दे, मुझे फर्क नहीं पड़ता।” उन्होंने अंतरिम सरकार व मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस पर अवामी लीग को खत्म करने की साजिश का आरोप लगाया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और विश्लेषण
भारत में शरण लिए हुए शेख हसीना ने कई बार इस मुकदमे को राजनीतिक साजिश बताया है। फैसले के बाद बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर असंतोष और हिंसा भड़कने की आशंका जताई जा रही है। अवामी लीग को आतंकवाद से जुड़े आरोपों के चलते बैन भी किया जा चुका है।
निष्कर्ष
शेख हसीना को फांसी की सजा बांग्लादेश की राजनीति, मानवाधिकार और न्याय व्यवस्था में ऐतिहासिक मोड़ है। इस फैसले का असर न सिर्फ बांग्लादेश, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति पर पड़ सकता है। फिलहाल हसीना भारत में निर्वासन में हैं और फैसला आने के बाद बांग्लादेश में अस्थिरता व तनाव की स्थिति है।
Correspondent – Shanwaz Khan



