बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है। 243 सदस्यीय विधानसभा में गठबंधन ने भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की, जबकि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई।
लेकिन जीत के कुछ ही घंटों बाद भाजपा ने संगठनात्मक अनुशासन पर बड़ा कदम उठाते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह सहित तीन नेताओं को 6 साल के लिए निलंबित कर दिया। इनमें कटिहार की मेयर ऊषा अग्रवाल और एमएलसी अशोक अग्रवाल भी शामिल हैं।
भाजपा ने क्या कहा?
पार्टी की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में लिखा गया:
“आपकी गतिविधियाँ लगातार पार्टी लाइन और अनुशासन के विपरीत रहीं। इससे पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचा है। यह गंभीर अनुशासनहीनता है। आपको छह वर्षों के लिए निलंबित किया जाता है। साथ ही कारण बताइए कि आपको स्थायी रूप से निष्कासित क्यों न किया जाए।”
सभी आरोपित नेताओं को एक सप्ताह में लिखित जवाब देने का निर्देश दिया गया है।
आरके सिंह पर कार्रवाई क्यों हुई?
चुनावी अभियान के दौरान आरके सिंह बार-बार बाग़ी तेवर दिखाते रहे।
मुख्य कारण:
- भाजपा के कई नेताओं पर सार्वजनिक रूप से भ्रष्टाचार के आरोप लगाए
- जन सुराज पार्टी प्रमुख प्रशांत किशोर के आरोपों का समर्थन
- कई मौकों पर NDA और भाजपा की नीतियों के खिलाफ बयान
- पार्टी के अनुशासन को लेकर लगातार सवाल खड़े किए
इन “एंटी-पार्टी गतिविधियों” को केंद्रीय नेतृत्व ने गंभीर माना, जिसके चलते चुनाव परिणाम आते ही उन पर एक्शन लिया गया।
आरके सिंह ने क्या कहा था?
सितंबर में एक चुनावी सभा में उन्होंने बेहद तीखा बयान देते हुए कहा था:
“मैं बिहार का गृह सचिव रह चुका हूँ। मेरे पास सबका हिसाब है। अगर कोई चू-चपड़ करेगा तो बखिया उधेड़ देंगे। भ्रष्ट और चरित्रहीन नेता धरती पर बोझ हैं।”
उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की शराबबंदी नीति की भी आलोचना की थी और इसे समाप्त करने की मांग की थी।
भाजपा का संदेश क्या है?
इस कार्रवाई के बाद पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि—
- जीत के बाद भी अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी
- संगठन में “सफाई अभियान” शुरू हो चुका है
- आने वाले दिनों में अन्य नेताओं पर भी कार्रवाई संभव
Correspondent – Shanwaz Khan



