Homeटेक्नोलॉजीदिल्ली द्वारका हादसा: रील के चक्कर में साहिल की गई जान, सिंगल...

दिल्ली द्वारका हादसा: रील के चक्कर में साहिल की गई जान, सिंगल मदर इना माकन की इंसाफ की पुकार, नाबालिग आरोपी को जेल भेजने की मांग

15 / 100 SEO Score

दिल्ली के द्वारका इलाके में 3 फरवरी को हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार की जिंदगी उजाड़ दी। 23 साल के साहिल धनेशरा की बाइक को एक नाबालिग द्वारा तेज रफ्तार में चलाई जा रही महिंद्रा स्कॉर्पियो ने टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि स्कॉर्पियो चालक स्टंटबाजी कर रहा था और पैसेंजर सीट पर बैठी उसकी बहन रील बना रही थी।

यह हादसा द्वारका साउथ के लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज के पास दोपहर करीब 11:57 बजे हुआ। पुलिस को पीसीआर कॉल मिली तो मौके पर पहुंची, जहां स्कॉर्पियो, एक डिजायर टैक्सी और साहिल की बाइक क्षतिग्रस्त हालत में मिली। साहिल को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया, जबकि टैक्सी ड्राइवर अजीत सिंह को आईजीआई अस्पताल ले जाया गया। उनकी पसलियां टूट गईं और सिर में गंभीर चोटें आईं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला कि साहिल को क्रैनियो-सीरेब्रल ट्रॉमा सहित स्प्लीन और लिवर में गंभीर क्षति हुई थी।​

वीडियो में कैद हादसे की पूरी कहानी

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। क्लिप में सफेद स्कॉर्पियो बेहद तेज रफ्तार से सड़क पर दौड़ती नजर आ रही है। चालक, जो 17 साल का नाबालिग क्षत्र सिंह बताया जा रहा है, बिना वैलिड ड्राइविंग लाइसेंस के गाड़ी चला रहा था। उसकी बहन कोमल पैसेंजर सीट पर मोबाइल से वीडियो शूट कर रही थी। गाड़ी विपरीत दिशा में घुस गई, जहां सामने से एक बस आ रही थी। बस के ठीक आगे स्टंट किया गया, जिससे बस चालक ने ब्रेक मारा। इसी दौरान पीछे अपनी लेन में नॉर्मल स्पीड से जा रहे साहिल की बाइक को जोरदार ठोकर लगी।​

टक्कर इतनी भयानक थी कि साहिल हवा में उछल गए। इसके बाद भी स्कॉर्पियो नहीं रुकी और आगे खड़ी टैक्सी से जा टकराई। टैक्सी खुद आगे पार्क्ड बस से धक्का खा गई, जो चार फुट पीछे खिसक गई। मौके पर मौजूद लोगों ने चिल्लाते हुए नाबालिग भाई-बहन को पकड़ लिया, जो भागने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने द्वारका साउथ थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की।

सिंगल मदर इना माकन का दर्द

साहिल की मां इना माकन, जो एक सिंगल मदर हैं, ने अपने इकलौते बेटे को 23 साल तक मुश्किलों से पाला। उनका रो-रोकर बयान सुन हर कोई स्तब्ध है। “मैंने अपने बच्चे को सिंगल मदर के रूप में पाला। एक रईसजादे ने स्पीड रील और स्टंट के लिए घर से स्कॉर्पियो निकाली। उस लड़के को गाड़ी चलाना भी नहीं आता, लाइसेंस नहीं था। 3 फरवरी को मेरे मासूम बेटे को ऑन द स्पॉट उड़ा दिया।”

इना बताती हैं कि साहिल कोई साधारण लड़का नहीं था। सेंट एंड्रूज कॉलेज से एक दिन में 6 मेडल जीत चुका था। हर एक्टिविटी में टॉप करता था। घर की छत पर हाथ से लिखे उसके बड़े सपने थे – बीबीए के बाद विदेश में मास्टर्स करना। वह पार्ट-टाइम जॉब कर मां पर बोझ न बनना चाहता था। ऑफिस से महज 200 मीटर दूर था जब यह दुर्घटना घटी। इना ने कहा, “यह हादसा नहीं, क्राइम है। ऐसे लापरवाह ड्राइविंग से किसी की पूरी दुनिया बर्बाद हो गई।”

कानूनी कार्रवाई और जमानत विवाद

हादसे के बाद नाबालिग को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) के सामने पेश किया गया और उसे ऑब्जर्वेशन होम भेज दिया गया। लेकिन 10 फरवरी को क्लास 10 की बोर्ड परीक्षाओं के नाम पर अंतरिम जमानत मिल गई। इना को यह फैसला नागवार गुजरा। “एक तरफ मेरा बेटा हमेशा के लिए चला गया, दूसरी तरफ आरोपी परीक्षा दे रहा है। मुझे इंसाफ चाहिए। आरोपी को जेल भेजा जाए।”

आरोपी के पिता पर भी सवाल उठे हैं। मोटर व्हीकल एक्ट के तहत नाबालिग को गाड़ी देने पर उन्हें जेल हो सकती है। जांच में पता चला कि स्कॉर्पियो पर पहले 13 ओवरस्पीडिंग चालान थे। फिर भी कोई सख्ती नहीं हुई। पिता का दावा है कि उन्हें रील या ड्राइविंग की जानकारी नहीं थी। पुलिस ने पिता को हिरासत में लेकर रिहा कर दिया, लेकिन चार्जशीट में नाम शामिल होगा।

सोशल मीडिया पर इंसाफ की मुहिम

इना ने सोशल मीडिया का सहारा लिया। ‘जस्टिस फॉर कबीर साहिल’ नाम से इंस्टाग्राम पेज और चेंज.ऑर्ग पर ऑनलाइन पिटीशन शुरू की, जिसमें 3 हजार से ज्यादा साइन हो चुके हैं। पुराने ‘जस्टिस अकाउंट’ को रिपोर्ट कर बंद करवा दिया गया, मनी लॉन्ड्रिंग का झूठा आरोप लगाकर। लेकिन इना ने हार नहीं मानी, नया अकाउंट बनाया। “मैं सारे स्टेटमेंट मीडिया को दे चुकी। पब्लिक से सबूत आ रहे हैं। आखिरी सांस तक लड़ूंगी।”

वीडियो और सबूतों को पुलिस को सौंपा जा चुका। इना की अपील है, “द्वारका के सभी मीडियाकर्मी और जनता मदद करें। कोई अमीर-गरीब नहीं देखा जाता। कानून सबके लिए बराबर हो।” यह मुहिम तेजी से वायरल हो रही है।

बड़े सवाल और सड़क सुरक्षा की चुनौतियां

यह मामला सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा पर बड़ा सवाल है। नाबालिगों को लग्जरी गाड़ियां क्यों मिल रही हैं? पहले चालानों पर सख्ती क्यों नहीं? चेकपोस्ट्स पर चेकिंग क्यों नाकाम? सोशल मीडिया रील्स के नाम पर सड़कें स्टंट ग्राउंड बन गई हैं। इना पूछती हैं, “नाबालिग ने कार चढ़ाई, कौन गुनहगार? पिता को भी सजा मिले।”

पुलिस जांच जारी है। आरोपी के वकील से डॉक्यूमेंट्स लिए गए। मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार। लेकिन इना की गुहार है – “यह बेलेबल ऑफेंस नहीं। सिस्टम बदलना होगा। कोई पैरेंट ऐसा दर्द न देखे।” साहिल जैसे युवाओं की मौत व्यर्थ न जाए, इसके लिए कानून में सख्त सुधार जरूरी। रील की सनक में जिंदगियां दांव पर लगाना बंद हो।

Correspondent – Shanwaz Khan

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments