रोहतक। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम को रोहतक की सुनारिया जेल में वापस भेज दिया गया है। उनकी हालिया 40 दिनों की पैरोल अवधि समाप्त हो गई, जिसके बाद भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें जेल ले जाया गया। 2017 में दो साध्वियों से बलात्कार और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे राम रहीम को यह 15वीं बार जेल से बाहर आने-लौटने का मौका मिला। इस बार पैरोल के दौरान वे सिरसा डेरे में रहे।
पैरोल की पूरी अवधि समाप्त
गुरमीत राम रहीम को जनवरी 2026 में सुनारिया जेल से 40 दिनों की पैरोल पर रिहा किया गया था। इस दौरान वे हरियाणा के सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय में रुके। डेरा प्रवक्ता ने बताया कि पैरोल के समय राम रहीम ने डेरा गतिविधियों में हिस्सा लिया, जिसमें सफाई अभियान, नशा मुक्ति कार्यक्रम और नए उत्पाद लॉन्च शामिल थे। पैरोल समाप्ति पर सोमवार को लग्जरी गाड़ियों के काफिले के साथ वे जेल लौटे। जेल अधिकारियों ने पुष्टि की कि सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। अब अगली पैरोल 2026 के अंत में या उसके बाद मिलने की संभावना है।
विवादों से घिरी पैरोल व्यवस्था
राम रहीम को अब तक 15 बार पैरोल या फरलो मिल चुकी है, जिसमें कुल 400 से अधिक दिन बाहर बिताए। विपक्षी दल और सामाजिक संगठन बार-बार सवाल उठाते रहे हैं कि रेप और मर्डर के दोषी को इतनी आसानी से छुट्टियां क्यों? हरियाणा सरकार पर राजनीतिक दबाव का आरोप लगता रहा है, खासकर चुनावों से पहले। 2017 की CBI अदालत ने उन्हें 20 साल की सजा सुनाई थी, जबकि पत्रकार हत्या मामले में अतिरिक्त सजा चल रही है। हाईकोर्ट ने भी कई बार पैरोल पर सख्ती बरतने को कहा, लेकिन जेल प्रशासन नियमों का हवाला देता रहा।
डेरा अनुयायियों की प्रतिक्रिया
सिरसा डेरे में राम रहीम के लौटने पर अनुयायी भावुक दिखे। उन्होंने भजन-कीर्तन कर भगवान से उसके स्वास्थ्य की प्रार्थना की। डेरा ने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि बाबा सादगी से सजा काट रहे हैं और समाज सेवा जारी रखेंगे। पैरोल के दौरान पुराने डेरे की मरम्मत, बोरवेल लगवाना और सरसों तेल जैसे उत्पाद लॉन्च किए गए। अनुयायी दावा करते हैं कि राम रहीम निर्दोष हैं और न्याय जल्द होगा।
कानूनी पृष्ठभूमि और भविष्य
गुरमीत राम रहीम 2017 से जेल में हैं। रेप केस में 10-10 साल की सजा चली, जबकि हत्या केस में उम्रकैद। सुप्रीम कोर्ट ने पैरोल नियमों को सख्त किया, लेकिन नियमित मेडिकल और पारिवारिक आधार पर मंजूरी मिलती रही। विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार पैरोल से न्याय व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। फिलहाल राम रहीम सुनारिया जेल में ही रहेंगे। अगली सुनवाई में क्या होता है, देखना बाकी।
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Rohtak – Piyush Dhar Diwedi



