जोधपुर: प्रतियोगी परीक्षाओं में ओएमआर शीट भरने की छोटी सी गलती से छात्रों का भविष्य दांव पर लगाने वाली प्रथा को राजस्थान हाईकोर्ट ने करारा झटका दिया है। जोधपुर बेंच ने JET 2025 परीक्षा में फिजिक्स की जगह गलती से एग्रीकल्चर कॉलम भरने वाले मेधावी छात्र रोहित गोदारा को बड़ी राहत दी। जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी ने विश्वविद्यालय के एडमिशन रद्द करने के आदेश को खारिज करते हुए कहा, “परीक्षा के दबाव में नर्वस होकर गलत कॉलम भरना मानवीय भूल है, न कि अपराध। ऐसी तकनीकी त्रुटि से मेधावी छात्र का कैरियर बर्बाद नहीं किया जा सकता।”
क्या थी छात्र की परेशानी?
रोहित गोदारा ने JET 2025 परीक्षा उत्तीर्ण की और बी.टेक फूड टेक्नोलॉजी में प्रोविजनल एडमिशन लेटर भी मिला। लेकिन एडमिशन स्टेज पर ओएमआर शीट में 12वीं के विषय फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी के बजाय एग्रीकल्चर गोला भरा मिला। विश्वविद्यालय ने नियमों का हवाला देकर एडमिशन रद्द कर दिया। रोहित ने सफाई दी कि क्लास 12वीं में उसने कभी एग्रीकल्चर नहीं पढ़ा, इसलिए जानबूझकर ऐसा नहीं कर सकता। अगर एग्रीकल्चर के अंक हटा भी दिए जाएं, तो केमिस्ट्री-बायोलॉजी के स्कोर से वह कटऑफ से ऊपर है।
कोर्ट का सख्त रुख: ‘गलती जानबूझकर नहीं’
कोर्ट ने विश्वविद्यालय के तर्क—”फिजिक्स कठिन है, इसलिए छात्र ने आसान एग्रीकल्चर चुना”—को सिरे से खारिज कर दिया। बेंच ने कहा, “जिस छात्र ने एग्रीकल्चर कभी पढ़ा ही नहीं, वह फिजिक्स के सवालों के साथ उसके कॉलम क्यों भरेगा? यह स्पष्ट मानवीय भूल है।” कोर्ट ने स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय को निर्देश दिए कि रोहित को उसकी JET रैंक के आधार पर तुरंत कॉलेज अलॉट करे। यह फैसला प्रतियोगी परीक्षाओं में लाखों छात्रों के लिए मिसाल बनेगा।
पुराने केसों से सीख: दिल्ली HC का भी यही रुख
यह पहला मामला नहीं है। दिल्ली हाईकोर्ट ने DSSSB भर्ती परीक्षा में कुसुम गुप्ता के ओएमआर शीट पर रोल नंबर बबलिंग की मामूली गलती के आधार पर उम्मीदवारी रद्द करने को अन्यायपूर्ण ठहराया था। छह साल की लड़ाई के बाद कोर्ट ने कहा कि परीक्षा सफल होने और ई-डॉसियर तक पहुंचने वाले उम्मीदवार को तकनीकी आधार पर बाहर नहीं किया जा सकता। दोनों फैसलों से साफ है कि हाईकोर्ट्स मानवीय भूलों को क्षमा करने के पक्ष में हैं।
छात्रों के लिए संदेश: दबाव में भूल नई उम्मीद
प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव सभी जानते हैं—टाइम प्रेशर, घबराहट और सेंटर का माहौल। कोर्ट ने स्पष्ट संदेश दिया कि मेरिट और योग्यता को तकनीकी खामियों से कुचलना न्याय नहीं। यह फैसला राजस्थान, यूपी, बिहार जैसे राज्यों की भर्ती परीक्षाओं पर असर डालेगा। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि OMR स्कैनिंग में मानवीय त्रुटि सुधारने के लिए सॉफ्टवेयर सुधार जरूरी हैं। रोहित जैसे छात्रों को न्याय मिला, लेकिन सिस्टम को और संवेदनशील बनाने की चुनौती बाकी है।
Correspondent – Shanwaz Khan



