पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में तृणमूल कांग्रेस के विधायक हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद के नाम पर नई मस्जिद बनाने के शिलान्यास की घोषणा कर विवाद को और बढ़ा दिया है। कबीर ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने पहले मस्जिद गिरा दी और राम मंदिर बना दिया, उस पर किसी ने भी कोई विरोध नहीं किया। अब जब वह बाबर के नाम पर मस्जिद बनाना चाहते हैं, तो इसका विरोध क्यों किया जा रहा है?
हुमायूं कबीर ने साफ कहा कि वह इस मस्जिद के निर्माण को लेकर पूरी तरह अड़े हुए हैं और इसके लिए वह अपनी जान भी देने को तैयार हैं। उन्होंने कहा, “अगर कोई मेरा सिर काटना चाहे तो शिलान्यास समारोह के दौरान आ सकता है। मैं शहीद होने के लिए तैयार हूं, लेकिन हम बाबरी मस्जिद बनाकर रहेंगे।” यह बयान राजनीतिक बहस को और तेज कर रहा है।
कबीर ने सवाल उठाया कि 464 साल पहले बाबर के सेनापति ने जब बाबरी मस्जिद बनवाई थी, उसे गिरा दिया गया और उसकी जगह राम मंदिर बना दिया गया, तब किसी ने विरोध नहीं किया। इसलिए अब भी वह बाबर के नाम पर मस्जिद बनाना चाहते हैं, तो उसका विरोध क्यों किया जा रहा है।
विधायक ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर सुप्रीम कोर्ट या गृह मंत्रालय ने बाबरी मस्जिद के निर्माण के खिलाफ कोई विरोधाभासी आदेश दिया है तो वह इसका सम्मान करेंगे। इसके बाद वह मस्जिद के लिए कोई दूसरा नाम रखने पर विचार करेंगे।
हालांकि, तृणमूल कांग्रेस पार्टी पहले ही इस विवादित बयान से खुद को अलग कर चुकी है। तृणमूल बंगाल की प्रदेश उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजूमदार ने कहा है कि यह हुमायूं कबीर का निजी मामला है और उनका पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने बताया कि कबीर ने ममता बनर्जी और पार्टी के नाम व प्रतीक का उपयोग चुनाव जीतने के लिए किया है, लेकिन जो भी वे कह रहे हैं या योजना बना रहे हैं, उसका तृणमूल कांग्रेस की राजनीति से कोई संबंध नहीं।
केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मस्जिद निर्माण का हक सभी के पास है। लेकिन यदि बाबरी मस्जिद दोबारा बनी तो राम मंदिर का निर्माण भी किया जाएगा। उन्होंने तृणमूल पार्टी और हुमायूं कबीर पर आरोप लगाया कि वे मुर्शिदाबाद में हिंदुओं को डराने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि वहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं।
यह बयान पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर रहा है, जहां धार्मिक और साम्प्रदायिक मुद्दे अक्सर राजनीतिक गतिशीलता पर बड़ा असर डालते हैं। मुर्शिदाबाद जैसे संवेदनशील जिलों में इस तरह की घोषणाएं समाज में तनाव पैदा कर सकती हैं, जिससे प्रशासन भी सतर्क हो गया है।
अब देखना होगा कि आगामी दिनों में यह मामला किस दिशा में बढ़ता है और राजनीतिक दल अपने मतभेदों को किस तरह संभालते हैं। साथ ही, क्या बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण को लेकर कोई कानूनी पहल होगी या नहीं, यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा।
Correspondent – Shanwaz khan



