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‘गवर्नर या राज्यसभा का पद स्वीकार नहीं करूंगा’ — रिटायरमेंट के बाद राजनीति पर बोले पूर्व CJI बीआर गवई

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भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बी.आर. गवई ने रिटायरमेंट के बाद अपने भविष्य की दिशा को लेकर बड़ा बयान दिया है। हाल ही में उन्होंने एक इंटरव्यू में साफ कहा कि वे राजनीति या किसी सरकारी पद की ओर कदम नहीं बढ़ाएंगे। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वे न तो किसी राज्य के गवर्नर बनेंगे, न किसी ट्रिब्यूनल के प्रमुख, और न ही राज्यसभा में नामांकित सदस्य बनना स्वीकार करेंगे।

21 नवंबर को सेवानिवृत्त हुए जस्टिस बी.आर. गवई की जगह अब जस्टिस सूर्यकांत ने देश के 51वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला है। रिटायरमेंट के बाद इंडिया टुडे से बातचीत में जस्टिस गवई ने कहा कि वे अभी सिर्फ शांति और सुकून का समय बिताना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “मैंने अपने जीवन के इस चरण में कुछ नहीं करने का फैसला किया है। अभी मैं बस शांति में रहना चाहता हूं। मुझे लगता है कि हर व्यक्ति को आज के दिन के हिसाब से जीना चाहिए, न कि भविष्य की योजनाओं पर तनाव लेना चाहिए।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या वे भविष्य में राजनीति में आ सकते हैं या किसी सार्वजनिक पद को स्वीकार करेंगे, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “जहां तक मुझे लगता है, मैं किसी भी ट्रिब्यूनल का प्रमुख नहीं बनूंगा, न ही गवर्नर पद स्वीकार करूंगा, और न राज्यसभा में नामांकन लूंगा। मैं इस बात पर पूरी तरह स्पष्ट हूं।”

जस्टिस गवई ने अपने कार्यकाल में कई ऐतिहासिक फैसलों में भूमिका निभाई। जानकारी के अनुसार, CJI रहते हुए वे 330 से अधिक फैसलों का हिस्सा रहे। उन्होंने न्यायपालिका में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।

इसी बीच, नए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने पदभार संभालने के पहले ही दिन सुप्रीम कोर्ट में एक नया मानदंड स्थापित किया। उन्होंने कहा कि अब तत्काल सुनवाई के लिए सभी मामलों का उल्लेख लिखित रूप में किया जाएगा। केवल मृत्युदंड या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में ही मौखिक अनुरोधों पर विचार किया जाएगा। 24 नवंबर को सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने पहले दिन करीब दो घंटे तक 17 मामलों की सुनवाई की।

बता दें कि इससे पहले पूर्व सीजेआई संजीव खन्ना ने तत्काल मामलों को मौखिक रूप से सूचीबद्ध करने की प्रथा समाप्त की थी, लेकिन जस्टिस गवई ने अपने कार्यकाल में इसे फिर से शुरू किया था। अब सुप्रीम कोर्ट में इस व्यवस्था को औपचारिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में काम हो रहा है।

Correspondent – Shanwaz khan

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