राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि वीर सावरकर को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न दिया जाता है, तो इससे भारत रत्न की गरिमा और सम्मान और अधिक बढ़ेगा। मोहन भागवत के इस बयान के बाद सियासी हलकों में एक बार फिर बहस तेज हो गई है।
मोहन भागवत ने कहा कि वीर सावरकर का जीवन देशभक्ति, त्याग और राष्ट्र के लिए समर्पण का प्रतीक रहा है। उन्होंने न केवल अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष किया, बल्कि भारत की स्वतंत्रता के विचार को मजबूती से आगे बढ़ाया। ऐसे महान व्यक्तित्व को भारत रत्न मिलना देश के लिए गौरव की बात होगी।
RSS प्रमुख ने कहा कि वीर सावरकर को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया और उनके योगदान को जानबूझकर कम करके आंका गया। उन्होंने कहा कि इतिहास के कुछ अध्यायों को राजनीतिक नजरिए से देखा गया, जिससे सावरकर जैसे क्रांतिकारियों के योगदान पर सवाल उठाए गए। भागवत के मुताबिक अब समय आ गया है कि देश उनके वास्तविक योगदान को पहचाने और उचित सम्मान दे।
मोहन भागवत ने यह भी कहा कि भारत रत्न किसी व्यक्ति को बड़ा नहीं बनाता, बल्कि व्यक्ति अपने कार्यों से सम्मान को बड़ा बनाता है। वीर सावरकर का जीवन इस बात का उदाहरण है कि उन्होंने राष्ट्र के लिए कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी संघर्ष किया। ऐसे में उन्हें भारत रत्न दिया जाना पूरी तरह उचित होगा।
उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। सत्तारूढ़ दल से जुड़े नेताओं ने मोहन भागवत के बयान का समर्थन किया है और कहा है कि वीर सावरकर को भारत रत्न मिलना चाहिए। वहीं विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि सरकार और संघ इस विषय का राजनीतिक लाभ उठाना चाहते हैं।
विपक्ष का कहना है कि भारत रत्न जैसे सर्वोच्च सम्मान को राजनीतिक विवाद से दूर रखा जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने सावरकर से जुड़े कुछ ऐतिहासिक पहलुओं को लेकर सवाल भी उठाए हैं। इसके जवाब में समर्थकों का कहना है कि सावरकर के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को किसी भी विवाद से ऊपर रखकर देखा जाना चाहिए।
गौरतलब है कि इससे पहले भी कई बार वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग उठ चुकी है, लेकिन अब RSS प्रमुख के बयान के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और क्या वास्तव में वीर सावरकर को भारत रत्न से सम्मानित किया जाता है।
Correspondent – Shanwaz Khan



