हाल ही में, भारत और इजराइल के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर दस्तखत हो गए हैं। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए औपचारिक बातचीत शुरू हो चुकी है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने तेल अवीव में इजराइली इकोनॉमी मिनिस्टर नीय बरकत की मौजूदगी में इस घोषणा को किया।
वर्तमान में, भारत और इजराइल के बीच करीब 6 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है। सितंबर 2025 में भारत ने इजराइल को लगभग 178 मिलियन डॉलर का निर्यात और 121 मिलियन डॉलर का आयात किया, जिससे कुल 56.8 मिलियन डॉलर का सकारात्मक व्यापार संतुलन बना। हालांकि, यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में थोड़ा घटा है, क्योंकि भारतीय निर्यात में लगभग 5 फीसदी और आयात में लगभग 20 फीसदी की गिरावट देखी गई है।
भारत से इजराइल को निर्यात होने वाली प्रमुख वस्तुओं में कीमती पत्थर, मोती, मशीनरी, टेक्सटाइल, कृषि उत्पाद, मोटर वाहन डीजल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग आइटम शामिल हैं। इस नया FTA समझौता इन वस्तुओं के निर्यात और व्यापार को और बढ़ावा देगा जिससे भारतीय किसानों और उद्यमियों को अधिक मौके मिलेंगे।
दोनों देशों ने संवेदनशील क्षेत्रों को समझौते से बाहर रखने का फैसला किया है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में कृषि, टेक्नोलॉजी, सर्विस सेक्टर, मछली पालन, साइबर सुरक्षा, एआई, क्वांटम कम्प्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग के लिए खास प्रावधान शामिल हैं। इस समझौते से भारत की टेक्नोलॉजी जरूरतों को पूरा करने में इजराइल मदद करेगा और भारत के लिए यह पूरे एशिया का हब बनने में सहायक होगा।
इजराइल की कई कंपनियां भारत में निवेश और उत्पादन बढ़ाने की इच्छुक हैं जो दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करेंगे। इसके साथ ही, दोनों देशों ने हाल ही में द्विपक्षीय निवेश समझौते (BIA) पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जिससे निवेश की प्रक्रिया और तेज होगी।
इस नई पहल से भारत-इजराइल व्यापार को नई दिशा मिलेगी और दोनों देशों के कारोबारी रिश्ते और प्रगाढ़ होंगे। यह समझौता वैश्विक व्यापार की चुनौतियों के बीच द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने का भी एक बड़ा कदम है।
Correspondent – Shanwaz Khan



