वाराणसी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि विरासत के नाम पर प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है. खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि सौंदर्यीकरण और व्यवसायीकरण की आड़ में सदियों पुरानी पहचान को मिटाने का प्रयास हो रहा है.
खरगे ने अपनी पोस्ट में लिखा कि बनारस के मणिकर्णिका घाट में बुलडोजर चलाकर धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को ध्वस्त किया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि पहले काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के नाम पर कई छोटे-बड़े मंदिर तोड़े गए और अब प्राचीन घाटों की बारी है. खरगे का कहना है कि सरकार का मकसद इतिहास की हर धरोहर को हटाकर केवल अपनी “नेम प्लेट” लगाना है.
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने पोस्ट के साथ कुछ तस्वीरें और वीडियो भी साझा किए, जिनमें तोड़ी गई मूर्तियां और निर्माण कार्य के दृश्य नजर आते हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि सदियों पुरानी मूर्तियों और मंदिरों को क्यों तोड़ा गया और उन्हें संग्रहालय में सुरक्षित क्यों नहीं रखा गया. खरगे ने यह भी पूछा कि काशी में मोक्ष की कामना लेकर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं का क्या होगा.

मणिकर्णिका घाट हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है. मान्यता है कि यहां अंतिम संस्कार करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. यह घाट वाराणसी के सबसे पुराने घाटों में शामिल है और इसकी कथा माता सती के कर्णफूल से जुड़ी बताई जाती है. इसी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के कारण घाट के पुनर्विकास को लेकर भावनाएं और भी संवेदनशील हो गई हैं.
मणिकर्णिका घाट पुनर्विकास परियोजना की नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 जुलाई 2023 को रखी थी. यह परियोजना काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का ही हिस्सा है. इसके तहत घाट को चौड़ा करने, तीर्थ यात्रियों के लिए रैंप और बैठने की व्यवस्था, VIP सीटिंग, लकड़ी बिक्री के लिए वुड प्लाजा, बेहतर साफ-सफाई, बाढ़ से सुरक्षा और स्किंदिया घाट तक बेहतर कनेक्टिविटी जैसे काम प्रस्तावित हैं. इस परियोजना पर करीब 17.56 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और इसे 2026 तक पूरा किया जाना है. सरकार का दावा है कि इसमें इको-फ्रेंडली तकनीक अपनाई जाएगी, जिससे लकड़ी की खपत और प्रदूषण दोनों कम होंगे.
हालांकि, स्थानीय लोगों और विपक्ष का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान कई प्राचीन मूर्तियां और छोटे-बड़े मंदिर क्षतिग्रस्त हुए हैं. वहीं, जिला प्रशासन इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहा है. प्रशासन का कहना है कि किसी भी मंदिर या सांस्कृतिक संरचना को नुकसान नहीं पहुंचाया जा रहा है और जो भी संरचनाएं हटाई जा रही हैं, उन्हें बाद में सुरक्षित रूप से पुनर्स्थापित किया जाएगा. वाराणसी कलेक्टर ने सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी है.
फिलहाल मणिकर्णिका घाट का पुनर्विकास धार्मिक आस्था, विरासत संरक्षण और आधुनिक सुविधाओं के बीच संतुलन का बड़ा मुद्दा बन गया है. एक तरफ सरकार इसे तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर सुविधा का कदम बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष और कुछ स्थानीय लोग इसे ऐतिहासिक धरोहरों पर खतरा मान रहे हैं. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है और सरकार तथा विरोधी पक्ष इस पर क्या रुख अपनाते हैं.
Corrospundent – Shanwaz khan



