राज्यसभा चुनाव 2026 की अधिसूचना जारी, 72 सीटों पर चुनाव: लोकसभा के साथ राज्यसभा क्यों जरूरी? भारत निर्वाचन आयोग ने राज्यसभा चुनावों का शेड्यूल घोषित किया है। 2026 में कुल 72 सीटें खाली होंगी, जिनमें पहला चरण मार्च में 37 सीटों का होगा।
राज्यसभा चुनाव 2026 का शेड्यूल
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनावों की अधिसूचना जारी की है। ये सीटें अप्रैल 2026 में रिक्त हो रही हैं। अधिसूचना 26 फरवरी को जारी हुई, नामांकन 5 मार्च तक, जांच 6 मार्च को, नाम वापसी 9 मार्च तक। वोटिंग 16 मार्च सुबह 9 से शाम 4 बजे तक, मतगणना उसी दिन शाम 5 बजे से। प्रभावित राज्य: महाराष्ट्र (7), तमिलनाडु (6), बिहार व पश्चिम बंगाल (5-5), ओडिशा (4), असम (3), तेलंगाना, छत्तीसगढ़ व हरियाणा (2-2), हिमाचल प्रदेश (1)। साल भर में जून (24 सीटें) व नवंबर (11 सीटें) में अन्य चरण होंगे।
लोकसभा होते हुए राज्यसभा क्यों?
भारत की संसद द्विसदनीय है: लोकसभा (जनता का प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व) व राज्यसभा (राज्यों का अप्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व)। राज्यसभा संघीय ढांचे को मजबूत करती है, कानूनों की गहन समीक्षा करती है, जल्दबाजी रोकती है व शासन में स्थिरता लाती है। यह स्थायी सदन है, कभी भंग नहीं होता। कुल 245 सदस्य: 233 चुने हुए, 12 नामित। लोकसभा भंग हो सकती है, लेकिन राज्यसभा निरंतरता सुनिश्चित करती है।
राज्यसभा चुनाव प्रणाली कैसे काम करती है?
राज्यसभा सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं। राज्य विधानसभा के विधायक (MLA) एकल संक्रमणीय वोट प्रणाली (STVP) से चुनते हैं। कोटा फॉर्मूला: (विधायक संख्या / (खाली सीटें +1)) +1। प्राथमिकता वोट से कोटा मिलने पर निर्वाचित। कार्यकाल 6 वर्ष, हर 2 वर्ष में 1/3 रिटायर। नामांकन के लिए 10 विधायकों का प्रस्तावक जरूरी। राष्ट्रपति नामित 12 सदस्यों को विशेषज्ञता के आधार पर चुना जाता है। यह प्रणाली राज्यों की आवाज संसद तक पहुंचाती है।
राजनीतिक महत्व
चुनाव NDA vs INDIA का मुकाबला होंगे। वर्तमान में BJP के 103, कांग्रेस 27 सदस्य। रिटायर: शरद पवार, अभिषेक मनु सिंघवी, रामदास अठावले आदि। ये चुनाव संसद में बहुमत प्रभावित करेंगे।
यह सिस्टम लोकतंत्र को संतुलित रखता है।
Correspondent – Shanwaz Khan



