नई दिल्ली: 2020 के उत्तर-पूर्व दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में भाजपा नेता व दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा को राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत मिली। कोर्ट ने मिश्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) दिग विनय सिंह ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर FIR का आदेश देना “मूलतः दोषपूर्ण, अवैध और अनुचित” होगा। यह फैसला ट्रायल कोर्ट के अप्रैल 2025 के आदेश को रद्द करता है।
याचिकाकर्ता मोहम्मद इलियास (यमुना विहार निवासी) ने अगस्त 2024 में याचिका दायर की थी। उन्होंने दावा किया कि 23 फरवरी 2020 को कर्दमपुरी में मिश्रा व अन्य सड़क जाम कर रेहड़ी-पटरी वालों के ठेले तोड़ रहे थे। इलियास ने कहा कि डीसीपी स्तर के पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे। याचिका में मिश्रा की कथित “भड़काऊ” भूमिका का आरोप लगाया गया।
दिल्ली पुलिस ने विरोध किया। कोर्ट को बताया कि दंगों से जुड़े 751 FIRs में व्यापक जांच हुई, मिश्रा का नाम कहीं नहीं। कोई ठोस सबूत नहीं मिला। पुलिस ने कहा कि घटना पहले से दर्ज FIR 59/2020 से जुड़ी है, नई जांच अनावश्यक। कोर्ट ने सहमति जताई- अलग FIR के लिए संज्ञेय अपराध का स्पष्ट प्रमाण चाहिए।
दंगों की पृष्ठभूमि
फरवरी 2020 में CAA-NRC विरोध प्रदर्शनों के दौरान उत्तर-पूर्व दिल्ली (जाफराबाद, चांद बाग, शिव विहार) में दंगे भड़के। 23 फरवरी से एक सप्ताह चले हंगामे में 53 मौतें (ज्यादातर मुस्लिम), 200+ घायल, करोड़ों की संपत्ति नष्ट। आगजनी, लिंचिंग की घटनाएं घटीं। दिल्ली पुलिस ने 2,500+ गिरफ्तारियां कीं। मिश्रा पर 26 फरवरी 2020 के भाषण को भड़काने का आरोप लगा, लेकिन जांच में क्लीन चिट। CBI ने भी मिश्रा की संलिप्तता नकार दी।
मिश्रा ने फैसले का स्वागत किया: “सत्य की जीत। राजनीतिक साजिश नाकाम।” याचिकाकर्ता के वकील निराश। यह फैसला दिल्ली दंगों के लंबे कानूनी चक्र का हिस्सा है।
Delhi – Piyush Dhar Diwedi



