जिनेवा। अमेरिका और ईरान के बीच तेहरान के विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम को लेकर स्विट्जरलैंड के जिनेवा में दूसरी दौर की अप्रत्यक्ष वार्ता शुरू हो गई है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल पहुंचा, जबकि अमेरिका की ओर से स्पेशल एनवॉय स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर हिस्सा ले रहे। ओमान के विदेश मंत्री बदर अल बुसैदी मध्यस्थता कर रहे हैं। पहली बैठक ओमान में हुई थी, जो सकारात्मक रही।
वार्ता का मुख्य एजेंडा
दूसरी बैठक में ईरान के यूरेनियम संवर्धन (60% तक) पर अंकुश लगाने, प्रतिबंध हटाने और क्षेत्रीय तनाव कम करने पर चर्चा होगी। अमेरिका चाहता है कि ईरान शांतिपूर्ण कार्यक्रम तक सीमित रहे, जबकि तेहरान सभी प्रतिबंध हटाने की शर्त पर सहमत हो। अराघची ने कहा, “शुरुआती बातचीत सकारात्मक रही, लेकिन जल्दबाजी ठीक नहीं।” IAEA चीफ राफेल ग्रॉसी से भी मुलाकात होगी। स्विस सरकार मेजबानी कर रही।
पृष्ठभूमि और तनाव
ट्रंप प्रशासन ने ईरान को ‘डील’ के लिए एक महीने का अल्टीमेटम दिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “रेजीम चेंज सबसे अच्छा विकल्प।” ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और हिजबुल्लाह-हमास फंडिंग पर इजरायल ने दबाव डाला। नेतन्याहू ने ट्रंप से मुलाकात कर हमले की मांग की। मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य तैनाती बढ़ी। ईरान ने न्यूक्लियर बैलिस्टिक मिसाइल टेस्ट की अटकलें खारिज कीं।
अप्रत्यक्ष बातचीत का महत्व
1979 की क्रांति के बाद दोनों देशों के बीच सीधी डिप्लोमेसी नहीं। ओमान पहली बार मध्यस्थ। सफलता से वैश्विक तेल कीमतें स्थिर होंगी, युद्ध का खतरा टलेगा। विफलता पर ट्रंप ने हमले की धमकी दी। IAEA रिपोर्ट: ईरान 400 किलो यूरेनियम जमा कर रहा, हथियार ग्रेड के करीब। UNHRC ने ईरान के मानवाधिकार उल्लंघन पर इमरजेंसी बैठक बुलाई।
वैश्विक प्रतिक्रिया
रूस-चीन ने अमेरिका की आलोचना की। भारत ने शांति की अपील की। बैठक मंगलवार सुबह 9:30 बजे (भारतीय समय दोपहर 2 बजे) शुरू। क्या समझौता होगा? दुनिया नजरें बिछाए है।
Correspondent – Shanwaz Khan



