भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन यानी गुरुवार, 18 दिसंबर 2025 को भी बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। बीएसई सेंसेक्स 41 अंक गिरकर 84,518 पर और एनएसई निफ्टी 53 अंक लुढ़ककर 25,765 अंकों पर खुला। लगातार चार दिनों से जारी इस गिरावट ने निवेशकों के मनोबल पर असर डाला है, जबकि वैश्विक संकेत भी फिलहाल कमजोर बने हुए हैं।
सुस्त शुरुआत, कमजोर सेंटीमेंट
गुरुवार सुबह एशियाई बाजारों में कमजोरी देखने को मिली, जिसका सीधा असर भारतीय इक्विटी मार्केट पर पड़ा। निवेशकों का रुझान सतर्क बना हुआ है, क्योंकि डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की वीकली एक्सपायरी और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों के प्रति अनिश्चितता बनी हुई है। इसके चलते बाजार में ट्रेडिंग सत्र की शुरुआत से ही दबाव देखा गया।
बुधवार, 17 दिसंबर को भी बाजार लाल निशान में बंद हुए थे। उस दिन सेंसेक्स 120.21 अंक या 0.14% की गिरावट के साथ 84,559.65 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 41.55 अंक या 0.16% टूटकर समाप्त हुआ।
टॉप लूजर्स और गेनर्स
शुरुआती कारोबार में कुछ दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई।
नुकसान में रहे शेयर: सनफार्मा, M&M, NTPC, टाटा स्टील, कोटक बैंक, मारुति सुजुकी और BEL।
मुनाफे में रहे शेयर: इंफोसिस, HCL टेक, टेक महिंद्रा, TCS, SBI और ITC।
सेक्टरवार निफ्टी इंडेक्स प्रदर्शन:
- निफ्टी ऑटो, निफ्टी फार्मा और निफ्टी रियल्टी शीर्ष लूजर्स रहे, जिनमें 1% तक की गिरावट आई।
- दूसरी ओर, निफ्टी IT ने 0.9% और PSU बैंक इंडेक्स ने 0.25% की बढ़त दिखाई।
- ब्रॉडर मार्केट में भी मामूली दबाव दिखा; निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप इंडेक्स दोनों लगभग 0.10% नीचे रहे।
ग्लोबल मार्केट का असर
वैश्विक बाजारों की कमजोरी का भार भारतीय शेयर बाजार भी झेल रहा है। 17 दिसंबर को अमेरिकी बाजारों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी।
- NASDAQ Composite 1.81% गिरा।
- S&P 500 में 1.16% की गिरावट रही।
- Dow Jones Industrial Average भी 0.47% फिसला।
यही रुझान एशियाई बाजारों में भी देखने मिला।
- जापान का निक्केई इंडेक्स 1.53% लुढ़का,
- टॉपिक्स सूचकांक 0.57% गिरा,
- दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.36% और कोसडैक 1.13% नीचे रहा।
- ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 इंडेक्स भी शुरुआती कारोबार में 0.3% फिसला।
इस अंतरराष्ट्रीय दबाव ने भारतीय बाजार के सेंटीमेंट को और कमजोर कर दिया।
गिरावट की मुख्य वजहें
1. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने पिछले कुछ हफ्तों से भारतीय शेयरों की लगातार बिकवाली जारी रखी है।
- बुधवार, 17 दिसंबर को FIIs ने 1,172 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले।
- इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 769 करोड़ रुपये की खरीदी की।
यह लगातार चौदहवां दिन था जब विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से निकासी की।
दिसंबर के पहले तीन हफ्तों में ही FIIs 21,073 करोड़ रुपये से ज्यादा पूंजी बाहर निकाल चुके हैं।
2. रुपये में रिकॉर्ड गिरावट
भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले दबाव में है।
- मंगलवार को रुपया 9 पैसे कमजोर होकर 90.87 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गया।
- बुधवार को हल्की रिकवरी दर्ज की गई और रुपया डॉलर के मुकाबले 90.35 के स्तर पर खुला।
मुद्रा की कमजोरी से विदेशी निवेशकों के रिटर्न कम होते हैं, जिससे वे निवेश कम करते हैं।
3. अमेरिकी रोजगार और ब्याज दर की अनिश्चितता
अमेरिका में नवंबर के रोजगार आंकड़े बेहतर आए – 64,000 नई नौकरियां जुड़ीं। लेकिन निवेशकों को दिसंबर के रोजगार और फेडरल रिजर्व की ब्याज नीति का इंतजार है।
यदि अमेरिका में नौकरी का बाजार मजबूत रहता है तो फेड ब्याज दरों को स्थिर या और ऊंचा रख सकता है, जिससे इक्विटी मार्केट से पूंजी आउटफ्लो बढ़ सकता है।
4. वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीति घोषणाएं
निवेशक बैंक ऑफ इंग्लैंड, यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) और बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीतियों का भी इंतजार कर रहे हैं।
जानकारों का मानना है कि जापान ब्याज दर बढ़ाकर 0.75% कर सकता है। इस आशंका से एशियाई बाजारों में अस्थिरता देखी जा रही है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विश्लेषकों का कहना है कि बाजार में फिलहाल साइडवेज़ ट्रेंड बना रहेगा जब तक विदेशी बिकवाली नहीं थमती। हालांकि, IT और बैंकिंग सेक्टर में मजबूती बाजार को कुछ सहारा दे सकती है। लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए यह गिरावट स्टॉक्स को डिस्काउंट पर खरीदने का मौका भी बन सकती है।
फिलहाल सभी की नजरें शुक्रवार के वैश्विक आर्थिक डेटा और अमेरिकी मार्केट मूवमेंट्स पर टिकी हैं, जो आने वाले सप्ताह के लिए दिशा तय करेंगे।
Correspondent – Shanwaz khan



