ऑस्ट्रेलिया-फ्रांस के बाद भारत सरकार बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर कड़े नियम लाने की तैयारी में है। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 17 फरवरी को ‘AI इम्पैक्ट समिट 2026’ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि मेटा, इंस्टाग्राम, फेसबुक जैसी कंपनियों से उम्र-आधारित प्रतिबंधों पर बातचीत चल रही है। इसका उद्देश्य नाबालिगों को गलत कंटेंट, साइबर बुलिंग और लत से बचाना है।
क्यों उठ रहा है बच्चों पर सोशल मीडिया का मुद्दा?
मोबाइल-इंटरनेट की आसानी से बच्चे कम उम्र में ही प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हो रहे हैं। आर्थिक सर्वे 2026 में डिजिटल लत, उम्र सत्यापन और सुरक्षित सेटिंग्स की सिफारिश की गई। संसदीय कमिटी ने भी अध्ययन कर सुझाव दिए। सरकार डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट के तहत उम्र-आधारित कंटेंट नियंत्रण मजबूत करेगी।
दूसरे देशों के सख्त नियम
ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र वालों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया, माता-पिता की सहमति अनिवार्य। फ्रांस में 15 साल से नीचे बच्चों के अकाउंट पर पैरेंटल कंसेंट जरूरी। ब्रिटेन में उम्र सत्यापन अनिवार्य। अमेरिका के कई राज्यों में इसी तरह कदम उठे। ये देश अनुभव भारत के लिए दिशा दिखा रहे हैं।
भारत में क्या होंगे नए नियम?
मंत्री वैष्णव ने कहा कि नई गाइडलाइंस या नीति जल्द आ सकती है। सोशल मीडिया कंपनियों को भारत के संविधान-कानून मानने होंगे। 18 साल से कम उम्र वालों के अकाउंट के लिए वेरिफाइड पैरेंटल कंसेंट, वर्चुअल टोकन सिस्टम और डिफॉल्ट सुरक्षित सेटिंग्स लागू हो सकती हैं। डीपफेक कंटेंट पर भी सख्ती। सभी पक्षों की राय लेकर नीति फाइनल होगी।
सरकार का उद्देश्य और प्रभाव
मोदी सरकार का फोकस सोशल मीडिया के फायदे बचाते हुए नुकसान रोकना। इससे बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षित माहौल मिलेगा। कंपनियां जैसे नेटफ्लिक्स, यूट्यूब, एक्स जिम्मेदार होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ये कदम डिजिटल इंडिया को मजबूत बनाएंगे। फिलहाल चर्चा चरण में है, लेकिन जल्द अमल संभव।
मंत्री ने जोर दिया कि वैश्विक ट्रेंड के साथ भारत चलेगा। IT सेक्टर में 200 अरब डॉलर निवेश की उम्मीद। ये नीति बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
Correspondent – Shanwaz Khan



