बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सीट शेयरिंग के विवाद से जूझ रहे महागठबंधन (इंडिया गठबंधन) ने अब डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू कर दी है। आरजेडी, कांग्रेस, वाम दल और वीआईपी के बीच चल रही खींचतान ने गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब एक दर्जन सीटों पर घटक दलों के उम्मीदवार आपस में ही आमने-सामने हैं। अब इस संकट को सुलझाने की जिम्मेदारी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पर्यवेक्षक अशोक गहलोत को दी गई है, जो बुधवार को पटना पहुंचकर माहौल शांत कराने की कोशिश करेंगे।
गहलोत की एंट्री से हल की उम्मीद
सूत्रों के अनुसार, अशोक गहलोत बुधवार सुबह पटना पहुंचेंगे और तेजस्वी यादव से मुलाकात करेंगे। इस बैठक का मुख्य एजेंडा “फ्रेंडली फाइट” वाली सीटों पर सहमति बनाना है। कांग्रेस को उम्मीद है कि गहलोत के राजनीतिक अनुभव और संतुलित छवि से गठबंधन के भीतर बनी दरार को कुछ हद तक भरा जा सकेगा। इसके साथ ही, वाम दलों और वीआईपी पार्टी के नेताओं के साथ भी एक साझा बैठक होने की संभावना है, ताकि आपसी तालमेल बहाल किया जा सके।
23 अक्टूबर को साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, अगर वार्ता सकारात्मक रही तो 23 अक्टूबर को तेजस्वी यादव की अगुवाई में इंडिया गठबंधन की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य जनता के बीच एकजुटता का संदेश देना होगा। चर्चा यह भी है कि इस मंच से तेजस्वी यादव को महागठबंधन का सीएम चेहरा घोषित किया जा सकता है।
फ्रेंडली फाइट खत्म करने की कवायद
फिलहाल आधा दर्जन से ज्यादा सीटों पर फ्रेंडली फाइट की स्थिति बनी हुई है। चार सीटों पर कांग्रेस और आरजेडी के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। वहीं, कुछ जगहों पर सीपीआई और कांग्रेस के प्रत्याशी भी भिड़ रहे हैं। 23 अक्टूबर को दूसरे चरण के लिए नाम वापसी की अंतिम तिथि है, और इसी दिन से पहले पटना में एक अहम बैठक कर इस विवाद को सुलझाने की कोशिश होगी।
पहले चरण में भी नहीं बनी सहमति
पहले चरण की लगभग 6 सीटों पर भी फ्रेंडली फाइट तय मानी जा रही है। हालांकि एक सीट पर कांग्रेस पहले ही अपना उम्मीदवार वापस ले चुकी है। फिर भी बछवाड़ा (बेगूसराय) जैसी सीटों पर सहमति बन पाना लगभग असंभव माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि “सौ फीसदी एकजुटता” इस चरण में संभव नहीं दिख रही, लेकिन अधिकतम सीटों पर सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी।
एनडीए संग तुलना में पिछड़ता महागठबंधन
जहां एक तरफ एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर कोई बड़ा विवाद नहीं हुआ, वहीं महागठबंधन के भीतर की खींचतान विपक्षी गठबंधन की छवि को नुकसान पहुंचा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर समय रहते विवाद नहीं सुलझा तो एनडीए को इसका सीधा फायदा मिलेगा।
निष्कर्ष:
बिहार चुनाव के इस अहम मोड़ पर महागठबंधन का भविष्य गहलोत की मध्यस्थता पर टिका है। अगर आज की बैठक में मतभेद सुलझ गए तो गठबंधन दोबारा एकजुट मोर्चे के रूप में सामने आ सकता है। लेकिन अगर बातचीत विफल रही, तो यह विवाद चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है।



