पटना:
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच अचानक तेजस्वी यादव ने दो बड़े ऐलान कर राजनीतिक हलचल मचा दी है। बुधवार को पटना में आयोजित एक औचक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने न केवल मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना पर नीतीश कुमार सरकार को निशाने पर लिया, बल्कि ‘जीविका दीदियों’ के लिए दो बड़े वादे कर चुनावी हवा का रुख बदलने की कोशिश की। महागठबंधन अब खुलकर महिला वोट बैंक को साधने की रणनीति पर उतर आया है, जो अब तक नीतीश कुमार की सबसे मजबूत ताकत मानी जाती रही है।
तेजस्वी के दो बड़े वादे
पहला, तेजस्वी यादव ने ऐलान किया कि बिहार में जितनी भी जीविका दीदियां हैं, उन्हें स्थायी सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाएगा।
दूसरा, उन्होंने वादा किया कि इन सभी दीदियों को हर महीने 30,000 रुपये का वेतन मिलेगा।
यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महिला रोजगार योजना ने पूरे राज्य में राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। तेजस्वी ने इस योजना को “रिश्वत योजना” बताते हुए कहा कि सरकार महिलाओं को उधार के पैसे दे रही है, जिन्हें भविष्य में लौटाना पड़ेगा।
नीतीश की महिला रोजगार योजना का असर
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 1.21 करोड़ महिलाओं के खातों में 10,000 रुपये की राशि भेजी है। हाल ही में 6 अक्टूबर को तीसरी किस्त के रूप में 21 लाख महिलाओं को लाभ मिला। इस योजना की शुरुआत 29 अगस्त को हुई थी और इसे राजनीतिक रूप से गेमचेंजर माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस स्कीम के जरिए नीतीश कुमार ने महिलाओं के बीच अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। यही वजह है कि तेजस्वी यादव ने इसका तोड़ खोजने के लिए महिला केंद्रित नीतियों का ऐलान करना शुरू किया है।
नीतीश के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश
महिलाएं लंबे समय से जेडीयू की कोर वोट बैंक रही हैं। पिछले चार विधानसभा चुनावों में महिला मतदाताओं ने नीतीश कुमार को भारी समर्थन दिया है। इसे ध्यान में रखते हुए तेजस्वी यादव ने टिकट बंटवारे में भी बड़ा दांव खेला।
इस बार आरजेडी ने 24 महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, जबकि जेडीयू और बीजेपी ने क्रमशः 13-13 महिला प्रत्याशी उतारे हैं। अब जीविका दीदियों को लेकर किए गए तेजस्वी के वादे से यह साफ है कि महागठबंधन इस वर्ग में सेंध लगाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है।
विपक्ष में बढ़ी बेचैनी
नीतीश सरकार की महिला केंद्रित नीतियों ने महागठबंधन के भीतर बेचैनी बढ़ा दी है। जीविका समूहों से जुड़ी करीब डेढ़ से दो लाख महिलाएं सीधे सरकार की योजनाओं से लाभान्वित हो रही हैं। ऐसे में तेजस्वी का यह ऐलान न सिर्फ एक राजनीतिक जवाबी हमला है, बल्कि महिला मतदाताओं को आकर्षित करने की रणनीति भी है।
नीतीश की योजनाओं से महिला सशक्तिकरण को बल
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं को पंचायत चुनाव में 50 फीसदी आरक्षण और सरकारी नौकरियों में 35 फीसदी आरक्षण पहले ही दे रखा है। अब महिला रोजगार योजना के जरिए उन्होंने आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम बढ़ाया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का चुनाव महिला वोटरों के इर्द-गिर्द घूमता नजर आ रहा है, और तेजस्वी यादव ने अपने दो वादों के जरिए इसी वर्ग में नई हलचल पैदा कर दी है।
निष्कर्ष:
तेजस्वी यादव का यह कदम साफ संकेत देता है कि महागठबंधन अब नीतीश कुमार के महिला वोट बैंक पर सीधा हमला बोल चुका है। चुनावी मौसम जैसे-जैसे गरम होगा, वैसे-वैसे इस “महिला कार्ड” की सियासी गूंज और तेज होती दिखेगी।



