पाकिस्तान में सैन्य संरचना में ऐतिहासिक बदलाव आ रहा है। 27वें संविधान संशोधन के बाद देश में रक्षाबलों के प्रमुख (CDF) का एक नया पद बनाया गया है, जिस पर सेना प्रमुख आसिम मुनीर की नियुक्ति होनी है. इस पद पर नियुक्ति के बाद आसिम मुनीर पाकिस्तान के इतिहास में सबसे ताकतवर सेना प्रमुख बन जाएंगे, लेकिन अभी तक उनकी नियुक्ति के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है.
इस विवाद के एक छोर पर पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर हैं तो दूसरे छोर पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ हैं, जो इस वक्त विदेश की यात्रा पर हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि शरीफ जानबूझकर इस मामले को नजरअंदाज कर रहे हैं और दूसरे देशों की यात्रा कर रहे हैं, ताकि CDF की नियुक्ति के लिए अधिसूचना जारी होने के समय वे मौजूद न हों.
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (NSAB) के सदस्य तिलक देवाशेर के मुताबिक, शरीफ आसिम मुनीर को सेना प्रमुख और CDF के तौर पर पांच साल के लिए नियुक्ति करने वाली अधिसूचना जारी नहीं करना चाहते. उनका कहना है कि शरीफ इस नियुक्ति के नतीजों से बचने के लिए जानबूझकर दूर रह रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं हो पाएगा.
पाकिस्तान के पास इस वक्त सेना प्रमुख नहीं है और न्यूक्लियर कमांड अथॉरिटी भी नेतृत्वविहीन है, क्योंकि आसिम मुनीर का सेना प्रमुख के तौर पर तीन साल का कार्यकाल 29 नवंबर 2025 को खत्म हो चुका है, लेकिन CDF पद पर उनकी नियुक्ति के लिए अभी तक अधिसूचना जारी नहीं हुई है. इससे देश की सैन्य और राजनीतिक हालत अनिश्चित है और एक नया विवाद खड़ा हो गया है.
आसिम मुनीर की CDF के तौर पर नियुक्ति होने पर उन्हें देश की तीनों सेनाओं—थल, वायु और नौ—का संयुक्त नेतृत्व मिलेगा और उनका कार्यकाल पांच साल का होगा. इससे थल सेना का प्रभुत्व और बढ़ेगा और नागरिक नेतृत्व की शक्ति पर असर पड़ सकता है.
इस बदलाव के बाद न केवल सैन्य नीतियां बल्कि देश की आंतरिक और बाह्य नीतियों पर भी आसिम मुनीर का प्रभाव दिखेगा. इस नियुक्ति के नतीजे न केवल पाकिस्तान बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण होंगे.
Correspondent – Shanwaz Khan



