Homeटॉप स्टोरीअमेरिका में ‘नो एंट्री’: ट्रंप ने 39 देशों तक बढ़ाया ट्रैवल बैन,...

अमेरिका में ‘नो एंट्री’: ट्रंप ने 39 देशों तक बढ़ाया ट्रैवल बैन, 1 जनवरी से होगा लागू

10 / 100 SEO Score

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा का हवाला देते हुए देश की आव्रजन नीति को और सख्त बना दिया है। उन्होंने 16 दिसंबर 2025 को एक बड़े फैसले के तहत सात नए देशों और फिलिस्तीनियों पर पूर्ण यात्रा प्रतिबंध (Full Travel Ban) लगाने की घोषणा की। इसके अलावा 15 अन्य देशों पर आंशिक प्रवेश प्रतिबंध (Partial Entry Restriction) लागू किया गया है। इस कदम के साथ ही अमेरिका द्वारा ट्रैवल बैन झेलने वाले देशों की कुल संख्या अब 39 हो गई है।

1 जनवरी से लागू होगी नई व्यवस्था

व्हाइट हाउस की आधिकारिक फ़ैक्ट शीट के अनुसार, नया ट्रैवल बैन और एंट्री रेस्ट्रिक्शन 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगा। प्रशासन का दावा है कि यह निर्णय कमजोर वीजा जांच प्रणाली, बढ़ती वीजा ओवरस्टे दरों और हालिया आतंकवादी गतिविधियों के खतरे को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इन कदमों का मकसद “राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा नियंत्रण को मज़बूत करना” है।

हालिया सुरक्षा घटनाओं के बाद सख्ती

यह कदम हाल की सुरक्षा घटनाओं की पृष्ठभूमि में उठाया गया है। 26 नवंबर को वॉशिंगटन डीसी में नेशनल गार्ड के दो जवानों की हत्या एक अफगान शरणार्थी ने की थी। इस घटना से अमेरिका में आव्रजन सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई थी। इसके अलावा 13 दिसंबर को सीरिया में इस्लामिक स्टेट के हमले में दो अमेरिकी सैनिकों और एक नागरिक दुभाषिए की मौत के बाद प्रशासन ने सुरक्षा उपायों को और सख्त करने का संकेत दिया था।

व्हाइट हाउस के अनुसार, “कई अफ्रीकी और एशियाई देशों में आतंकवाद का खतरा, आंतरिक संघर्ष, और उच्च वीजा ओवरस्टे दरें प्रमुख चिन्हित कारण हैं।” बुर्किना फासो, माली, नाइजर और नाइजीरिया में सक्रिय आतंकी नेटवर्क का हवाला देते हुए उन्हें “उच्च-जोखिम वाले देश” के रूप में चिन्हित किया गया है।

इन 7 देशों पर पूर्ण प्रतिबंध

नए आदेश के तहत बुर्किना फासो, माली, नाइजर, दक्षिण सूडान, सीरिया, लाओस और सिएरा लियोन पर पूर्ण ट्रैवल बैन लगा दिया गया है। इसके अतिरिक्त फिलिस्तीनी अथॉरिटी द्वारा जारी यात्रा दस्तावेज़ रखने वाले फिलिस्तीनियों को भी प्रतिबंधित सूची में शामिल किया गया है। इन देशों के नागरिक अब किसी भी प्रकार के आप्रवासी या गैर-आप्रवासी वीजा पर अमेरिका में प्रवेश नहीं कर सकेंगे।

प्रशासन का कहना है कि सीरिया कई वर्षों से जारी गृहयुद्ध के कारण “पासपोर्ट और नागरिक दस्तावेज़ जारी करने के लिए पर्याप्त केंद्रीय प्राधिकरण” स्थापित नहीं कर पाया है, जिससे पहचान सत्यापन मुश्किल हो गया है।

15 देशों पर आंशिक प्रवेश प्रतिबंध

आंशिक पाबंदियां उन देशों पर लगाई गई हैं जहाँ वीज़ा प्रणाली या पहचान सत्यापन में खामियां पाई गई हैं, लेकिन आतंकवादी गतिविधियों का जोखिम अपेक्षाकृत कम है। इनमें शामिल हैं — अंगोला, एंटीगुआ और बारबुडा, बेनिन, कोट डी’आईवोर, डोमिनिका, गैबॉन, द गाम्बिया, मलावी, मॉरिटानिया, नाइजीरिया, सेनेगल, तंजानिया, टोंगा, जाम्बिया और जिम्बाब्वे

इसके साथ ही बुरुंडी, क्यूबा, टोगो और वेनेजुएला पर पहले से लागू आंशिक प्रतिबंध यथावत रहेंगे। वहीं, तुर्कमेनिस्तान को इस बार एकमात्र राहत मिली है — उसके नागरिकों के लिए गैर-आप्रवासी वीजा पर लगी रोक हटा ली गई है।

पहले से प्रतिबंधित 12 देश

अमेरिका पहले से ही अफगानिस्तान, म्यांमार, चाड, कांगो गणराज्य, इक्वेटोरियल गिनी, एरीट्रिया, हैती, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान और यमन के नागरिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लागू कर चुका है। इन देशों को “अत्यधिक सुरक्षा जोखिम वाले” के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

किन्हें मिलेगी छूट

ट्रंप प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि कुछ सीमित श्रेणियों को छूट मिलती रहेगी। इनमें शामिल हैं:

  • अमेरिका के स्थायी निवासी (ग्रीन कार्ड होल्डर)
  • मौजूदा वीजा धारक जिनके वीजा पहले जारी हो चुके हैं।
  • राजनयिक, खिलाड़ी, सांस्कृतिक प्रतिनिधि और राष्ट्रीय हित से जुड़े व्यक्ति
  • ऐसे मामलों में, जहाँ केस-बाय-केस वेवर (व्यक्तिगत छूट) उचित समझी जाएगी।

हालाँकि, परिवार-आधारित वीजा श्रेणियों में छूट को सीमित किया गया है। प्रशासन ने कहा है कि यह नीतिगत बदलाव स्थायी नहीं बल्कि “समीक्षा-आधारित” होगा, जिसे सुरक्षा आकलन के आधार पर संशोधित किया जा सकता है।

ट्रंप की नीति पर बढ़े राजनीतिक संकेत

इस कदम ने अमेरिकी राजनीति में फिर से आव्रजन नीति को गर्म मुद्दा बना दिया है। रिपब्लिकन दल इसे “राष्ट्रीय सुरक्षा की दिशा में दृढ़ कदम” बता रहा है, जबकि डेमोक्रेटिक नेताओं और मानवाधिकार संगठनों ने इसे “भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक” करार दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी वर्ष में यह निर्णय ट्रंप के “कठोर सुरक्षा रुख” को और मजबूत करेगा।

Correspondent – Shanwaz khan

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments