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SIR 2025: महिला या पुरुष? मध्य प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन में सबसे ज्यादा किसके कटे नाम—आंकड़े चौंकाने वाले

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मध्य प्रदेश में 2025 के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद सामने आए आंकड़ों ने चुनावी व्यवस्था और सामाजिक वास्तविकताओं दोनों पर नई बहस छेड़ दी है। भारत का चुनाव आयोग द्वारा कराए गए इस व्यापक रिवीजन के बाद राज्य की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की गई, जिसमें एक ही प्रक्रिया में 42 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि हटाए गए नामों में महिलाओं की संख्या पुरुषों से कहीं अधिक पाई गई।

एक ही रिवीजन में 42 लाख से ज्यादा नाम हटे

मध्य प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध डेटा के अनुसार, SIR 2025 के दौरान कुल 42.74 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए। इसके अलावा करीब 8.40 लाख ऐसे वोटर पाए गए, जिन्हें वेरिफिकेशन के दौरान “मैप नहीं किया जा सका।” यानी उनके पते या पहचान से जुड़े दस्तावेजों की पुष्टि नहीं हो सकी।

महिलाओं के नाम सबसे ज्यादा कटे

लिंग के आधार पर आंकड़ों का विश्लेषण किया जाए तो स्थिति और भी चौंकाने वाली है। कुल हटाए गए नामों में 26.64 लाख महिला मतदाता शामिल हैं, जबकि पुरुषों के 19.19 लाख नाम सूची से हटाए गए। साफ है कि इस रिवीजन का असर महिलाओं पर अपेक्षाकृत ज्यादा पड़ा।

महिलाओं के नाम क्यों हटे ज्यादा?

विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी सबसे बड़ी वजह शादी के बाद होने वाला माइग्रेशन है। भारत में बड़ी संख्या में महिलाएं विवाह के बाद अपने मूल जिले या राज्य से दूसरे स्थान पर चली जाती हैं। ऐसे में वे वोटर आईडी, आधार या राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों को समय पर अपडेट नहीं करा पातीं। घर-घर जाकर हुए वेरिफिकेशन में यदि कोई मतदाता अपने रजिस्टर्ड पते पर नहीं मिला और वैकल्पिक दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं हुए, तो उसका नाम सूची से हटा दिया गया।

शहरी इलाकों में ज्यादा असर

SIR 2025 का प्रभाव शहरी क्षेत्रों में ज्यादा देखने को मिला। राज्य की राजधानी भोपाल में अकेले करीब 4.38 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए। वहीं इंदौर में यह संख्या लगभग 1.75 लाख रही। शहरी इलाकों में बार-बार पता बदलना और अस्थायी निवास इसकी प्रमुख वजह मानी जा रही है।

नाम हटने के मुख्य कारण

आंकड़ों के मुताबिक, सबसे बड़ा कारण माइग्रेशन रहा। करीब 31.51 लाख मतदाताओं के नाम इसलिए हटाए गए क्योंकि वे अपने दर्ज पते पर नहीं मिले। इसके अलावा लगभग 8.46 लाख नाम मतदाताओं की मृत्यु के कारण हटाए गए, जबकि 2.77 लाख नाम डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन पाए जाने पर हटाए गए।

क्या कहता है यह रिवीजन?

SIR 2025 का उद्देश्य चुनावी रोल को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना है। हालांकि, आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि सामाजिक कारणों—खासकर महिला माइग्रेशन—का चुनावी भागीदारी पर गहरा असर पड़ता है। आने वाले समय में यह जरूरी होगा कि ऐसी प्रक्रियाओं में महिलाओं के दस्तावेज अपडेट और जागरूकता पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि कोई भी योग्य मतदाता अपने अधिकार से वंचित न हो।

Corrospondent – Shanwaz Khan

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