जयपुर: राजस्थान विधानसभा में आज (11 फरवरी 2026) वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश होगा। उपमुख्यमंत्री兼वित्त मंत्री दीया कुमारी सुबह 11 बजे तीसरी बार बजट प्रस्तुत करेंगी। 28 जनवरी से चल रहे बजट सत्र के बीच आने वाला यह बजट राज्य की आर्थिक दिशा तय करेगा। पिछले वर्ष के 5.37 लाख करोड़ के मुकाबले आकार 7-10% बढ़कर 5.80-5.90 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। भजनलाल शर्मा सरकार का यह तीसरा बजट विकास, रोजगार और समावेशिता पर केंद्रित होगा।
बजट का अनुमानित आकार और राजनीतिक महत्व
वित्त विभाग के स्रोतों के मुताबिक, बजट में केंद्र की योजनाओं से मिलने वाले अनुदान (लगभग 1.20 लाख करोड़) और राज्य के अपने राजस्व (टैक्स कलेक्शन में 15% वृद्धि) को ध्यान में रखा गया है। उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा ने कहा, “यह समावेशी बजट होगा, जिसमें सभी वर्गों—युवा, किसान, महिलाएं—का ख्याल रखा जाएगा।” भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने इसे “राजस्थान के समग्र विकास का रोडमैप” बताया। हालांकि, आर्थिक चुनौतियां जैसे सूखा, महंगाई और कर्ज (राज्य का कर्ज 6 लाख करोड़ से अधिक) बजट को प्रभावित करेंगी।
जनता की प्रमुख उम्मीदें: नौकरी से टैक्स तक
युवाओं को 1.50 लाख नई सरकारी भर्तियों का कैलेंडर, किसानों को सम्मान निधि में 50% बढ़ोतरी (वर्तमान ₹6000 से ₹9000 सालाना), महिलाओं के लिए पिंक बसें और लैपटॉप योजना का विस्तार की अपेक्षा है। बुनियादी ढांचे में जयपुर-उदयपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, मेट्रो विस्तार (जोधपुर-अजमेर) और 5000 किमी नई सड़कें शामिल हो सकती हैं। टैक्स राहत में पेट्रोल-डीजल पर वैट 4% कम करना, प्रॉपर्टी टैक्स में छूट और बिजली बिल पर सब्सिडी (₹500 प्रति कनेक्शन) की चर्चा है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 100 नए होमस्टे और हेरिटेज कॉरिडोर पर फोकस रहेगा।
विपक्ष का हमला: घोषणाओं का ‘पर्ची-पत्री’ बजट?
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने बजट को पहले ही “जुमलों का पुलिंदा” बता दिया। उन्होंने कहा, “पिछले बजट की 2717 घोषणाओं में सिर्फ 754 (28%) पूरी हुईं। 707 घोषणाएं (26%) दो साल बाद भी अधर में लटकी हैं।” जूली ने बेरोजगारी दर (15.5%), किसान आत्महत्याओं और महिलाओं पर अपराध बढ़ने का हवाला देकर सरकार को घेरा। कांग्रेस ने स्ट्रीट प्रोटेस्ट की चेतावनी दी है।
क्या बदलेगा राजस्थान का भविष्य?
यह बजट न केवल आर्थिक नीतियां तय करेगा, बल्कि 2028 चुनावों की जमीन भी तैयार करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि रोजगार और किसान फोकस से सरकार मजबूत हो सकती है, लेकिन कर्ज नियंत्रण जरूरी। आमजन की नजरें टैक्स राहत और नौकरियों पर टिकी हैं। क्या दीया कुमारी निराशा दूर करेंगी?
Rajasthan – Piyush Dhar Diwedi



