बिहार विधानसभा में बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर के विवादित बयान ने राजनीतिक गलियारों में हंगामा मचा दिया है। दरभंगा के अलीनगर से नवनिर्वाचित 25 वर्षीय गायिका-विधायक ने आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की तुलना महाभारत के ‘धृतराष्ट्र’ से और उनके पुत्र तेजस्वी यादव को ‘दुर्योधन’ से कर दी। इस पर भोजपुरी सुपरस्टार और आरजेडी नेता खेसारी लाल यादव ने कड़ा पलटवार किया है।
मैथिली का बयान क्या था?
बजट सत्र के दौरान शिक्षा विभाग की चर्चा में मैथिली ने लालू-राबड़ी राज (2005 पूर्व) को ‘जंगलराज’ बताते हुए कहा, “धृतराष्ट्र अनुभवी राजा थे लेकिन अंधे। उन्हें हस्तिनापुर की चिंता नहीं, दुर्योधन की थी।” उन्होंने गांव की महिलाओं का उदाहरण दिया कि शाम 5-6 बजे गाड़ी से निकलना खतरनाक था। नीतीश कुमार की साइकिल योजना की तारीफ की। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। तेजस्वी ने बिना नाम लिए पोस्ट शेयर कर तंज कसा कि कुछ लोग विधायक बनते ही सब जानने का भ्रम पाल लेते हैं।
खेसारी का करारा जवाब:
खेसारी ने वीडियो में कहा, “कम उम्र में उपलब्धियां मिल जाती हैं तो इंसान ऐसे ही बोलता है। उनके ज्ञान बहुत कम हैं। राजनीति में पढ़े-लिखे लोगों की जरूरत है, जिन्हें देश-दुनिया की जानकारी हो।” उन्होंने जोड़ा, “राजनीति में आने का मतलब इंसानियत और संस्कार भूलना नहीं। तेजस्वी यादव बड़े भाई जैसे हैं, लालू जी पिता तुल्य। ऐसी भाषा शोभा नहीं देती। बिहार की उन्नति काम से होगी, किसी को छोटा करके नहीं।”
खेसारी ने कलाकार होने का हवाला देकर टिप्पणी रोकी, लेकिन नसीहत दी कि चुनावी माहौल में भी शब्द सोच-समझकर चुनें।
पवन सिंह वाले तंज पर सफाई:
जब पवन सिंह के गाने (‘खेत में पवन सिंह का पावर, गड्ढे में खेसरिया’) का जिक्र किया गया, तो खेसारी बोले, “वो जहां हैं, अच्छा; मैं जहां हूं, अच्छा। उनके साथ व्यक्तिगत रिश्ता है, सम्मान करता रहूंगा। न संगीत का भला होगा, न बिहार का।” [query context] यह भोजपुरी इंडस्ट्री के पुराने विवाद को इंगित करता है।
राजनीतिक प्रभाव:
दोनों कलाकार विधायक हैं—मैथिली (बीजेपी, अलीनगर), खेसारी (आरजेडी)। यह विवाद बिहार की सियासत को भोजपुरी-मैथिली संगीत से जोड़ता है। एनडीए vs महागठबंधन में ‘जंगलराज’ vs ‘सुशासन’ बहस तेज हुई। विशेषज्ञ कहते हैं, युवा नेताओं के बयान वायरल होकर वोट बैंक प्रभावित करते हैं। खेसारी का स्टैंड आरजेडी को मजबूत कर सकता है।
बिहार की राजनीति में कलाकारों का दखल बढ़ रहा है। क्या यह विवाद सकारात्मक बहस लाएगा या ध्रुवीकरण? समय बताएगा।
Bihar – Piyush Dhar Diwedi



