महाराष्ट्र की भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका (BNCMC) में मेयर पद के चुनाव ने सियासी हलचल मचा दी है। विरोधी दलों कांग्रेस और बीजेपी ने हाथ मिला लिया है, जिससे महायुति के सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना को करारा झटका लगा है। बीजेपी ने स्नेहा पाटील को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया, जिसे कांग्रेस ने औपचारिक पत्र देकर समर्थन घोषित कर दिया। यह असामान्य गठबंधन 20 फरवरी को होने वाले चुनाव को रोमांचक बना रहा है।
चुनाव परिणाम और बहुमत की जद्दोजहद
15 जनवरी 2026 को हुए 29 महानगरपालिका चुनावों के नतीजे 16 जनवरी को आए। भिवंडी की 90 सीटों में किसी को स्पष्ट बहुमत (46+) नहीं मिला। कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी (30 सीटें), उसके बाद बीजेपी (22)। एनसीपी (शरद पवार गुट)-12, शिंदे शिवसेना-12, समाजवादी पार्टी-6, कोणार्क विकास आघाड़ी-5, भिवंडी विकास आघाड़ी-3 और एक निर्दलीय। बीजेपी-शिंदे शिवसेना गठजोड़ के पास मात्र 34 सीटें, जबकि सेक्युलर मोर्चा (कांग्रेस+एनसीपी+सपा) के पास 48।
उम्मीदवार बदलाव और कांग्रेस समर्थन
शुरू में बीजेपी ने नारायण चौधरी को मेयर उम्मीदवार बनाया, लेकिन अंतिम समय में स्नेहा मेहुल पाटील को चुना। भिवंडी बीजेपी अध्यक्ष रविकांत सावंत ने सभी पार्षदों को पत्र लिखकर समर्थन का निर्देश दिया। कांग्रेस ने इसे ‘सेक्युलर उम्मीदवार’ बताते हुए आधिकारिक समर्थन की घोषणा की, जो महाराष्ट्र राजनीति में दुर्लभ है। लोकसभा सांसद अनिल देसाई ने इसे आश्चर्यजनक बताया। यह कदम शिंदे शिवसेना को मेयर पद से दूर रखने की रणनीति माना जा रहा है।
शिंदे शिवसेना पर BJP का दांव?
महायुति में सत्ता साझेदारी के बावजूद स्थानीय स्तर पर जोड़तोड़ तेज है। शिंदे शिवसेना ने मेयर-डिप्टी मेयर खुद लड़ने के संकेत दिए, लेकिन बीजेपी ने कांग्रेस से हाथ मिलाकर समीकरण उलट दिए। चंद्रपुर में भी बीजेपी ने शिवसेना (UBT) से गठजोड़ किया था, जो भिवंडी में दोहराया जा रहा। एनसीपी नेता सुरेश म्हात्रे (बाल्या मामा) की प्रतिष्ठा दांव पर है। यदि स्नेहा पाटील जीत गईं, तो महायुति का गठबंधन टूटने की आशंका। निर्दलीय पार्षद निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
राजनीतिक निहितार्थ
यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की लोकल राजनीति को दर्शाता है, जहां विधानसभा स्तर का गठजोड़ टूट जाता है। मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में भिवंडी महत्वपूर्ण है, जो टेक्सटाइल हब है। कांग्रेस की सबसे बड़ी पार्टी वाली स्थिति मजबूत हुई, लेकिन समर्थन से बीजेपी को फायदा। शिंदे गुट के लिए यह हार सत्ता में दरार डाल सकती है। मेयर चुनाव नतीजे 21वीं सदी की सियासत में ‘दुश्मन के दुश्मन को दोस्त’ की नीति को रेखांकित करेंगे। भिवंडी के नागरिक विकास कार्यों पर नजर रखें।
Correspondent – Shanwaz Khan



