बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। एनडीए और महागठबंधन के बीच जहां चुनावी रैलियों की जंग तेज है, वहीं जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर अपनी अलग राजनीतिक लहर बनाने में जुटे हैं। रविवार को मोतिहारी में आयोजित सभा में उन्होंने आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों पर तीखा हमला बोला।
प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर तेजस्वी यादव महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं, तो उन्हें सबसे पहले अपने माता-पिता — लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी — के शासनकाल के लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा, “जब तक तेजस्वी यह स्वीकार नहीं करते कि उनके परिवार के शासन में बिहार में जंगलराज था, तब तक उनके विकास के वादे खोखले लगते हैं।” किशोर ने आगे कहा कि कांग्रेस ने सिख दंगों के लिए माफी मांगी थी, उसी तरह आरजेडी को भी 15 साल के अपने शासनकाल की गलतियों को स्वीकार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर तेजस्वी सच में बदलाव की राजनीति करना चाहते हैं, तो उन्हें अपने अतीत से सबक लेकर जनता के सामने ईमानदारी से खड़ा होना चाहिए। तभी जनता उन्हें दूसरा मौका देने पर विचार करेगी।
पीएम मोदी पर वादाखिलाफी का आरोप
सभा के दौरान प्रशांत किशोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी हमला बोला और एक पुरानी घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि “2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान मोतिहारी में पीएम मोदी का जो भाषण हुआ था, उसका ड्राफ्ट मैंने खुद लिखा था। उस भाषण में मोदी जी ने कहा था कि जब अगली बार मैं मोतिहारी आऊंगा, तो इसी चीनी मिल की चीनी से बनी चाय पीऊंगा। लेकिन अब 11 साल बीत गए, न मिल चालू हुई, न वादा पूरा हुआ।”
किशोर ने सवाल उठाया कि अगर प्रधानमंत्री खुद उस वक्त वादा कर गए थे, तो अब तक मोतिहारी की मिलें क्यों बंद हैं? उन्होंने कहा कि बिहार की जनता बार-बार उन नेताओं को वोट देती रही है, जिन्होंने सिर्फ वादे किए लेकिन विकास नहीं दिया। “अगर फैक्ट्री चाहिए तो फैक्ट्री के लिए वोट दीजिए, जाति या पार्टी के लिए नहीं,” उन्होंने कहा।
जन सुराज: ‘सत्ता नहीं, सुधार की राजनीति’
किशोर ने कहा कि जन सुराज का आंदोलन किसी व्यक्ति की महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों की लड़ाई है। उनका कहना था कि भाजपा, जदयू और राजद सभी पार्टियां सिर्फ सत्ता के लिए राजनीति करती हैं, जबकि जन सुराज बिहार की राजनीति को जाति, धर्म और कमीशनखोरी से मुक्त करना चाहता है।
उन्होंने कहा कि बिहार को अब लेने की नहीं, देने की राजनीति की जरूरत है। “हमारा लक्ष्य है कि बिहार का हर नागरिक खुद को सशक्त महसूस करे। जन सुराज किसी सेलिब्रिटी का आंदोलन नहीं, बल्कि जनता की भागीदारी से चलने वाला परिवर्तन अभियान है,” उन्होंने कहा।
सम्राट चौधरी पर व्यक्तिगत वार
प्रशांत किशोर ने एनडीए के मुख्यमंत्री पद के चेहरे सम्राट चौधरी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा ऐसे व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाना चाहती है जो “सातवीं फेल है और हत्या के सात मामलों का आरोपी रह चुका है।” किशोर ने व्यंग्य करते हुए कहा, “तेजस्वी यादव अगर नौवीं फेल हैं, तो कम से कम यह सच बोलते हैं। लेकिन सम्राट चौधरी तो यह भी नहीं बताते कि मैट्रिक कब पास किया।”
सभा के अंत में उन्होंने जनता से अपील की कि बिहार में असली बदलाव तभी आएगा जब लोग जातीय समीकरणों से ऊपर उठकर विकास के लिए वोट देंगे। “जब तक गलत को गलत नहीं कहेंगे, तब तक बिहार में सुधार असंभव है,” उन्होंने कहा।
संदेश साफ था — अब बिहार को सत्ता नहीं, सुशासन और जवाबदेही की राजनीति चाहिए।



