मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1045 हो गई है। ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में तेज हवाई हमलों ने तेहरान, कोनार्क नेवल बेस और अन्य शहरों को निशाना बनाया है।
हमलों का भयावह चित्र
हमलों का दौर 27 फरवरी से शुरू हुआ, जब इजरायल ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर पहले हमले किए। अमेरिका ने जल्द ही इसमें शामिल होकर मिसाइलें दागीं। कोनार्क नेवल बेस पर तीन ईरानी जहाज डूब गए, जिसमें नेवी चीफ शाहराम ईरानी की मौत हुई। मिनाब में एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 160 छात्राओं की जान चली गई। ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट 48 घंटे से जारी है।
ईरान का पलटवार और वैश्विक प्रभाव
ईरान ने जवाबी कार्रवाई में मिसाइलें दागीं, जिससे कुवैत में कई अमेरिकी वॉरप्लेन क्रैश हो गए। हालांकि सभी क्रू सदस्य सुरक्षित बताए जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक ईरान का परमाणु खतरा पूरी तरह समाप्त न हो जाए। ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने ईरान के जवाबी हमलों को ‘लापरवाह’ बताते हुए अमेरिका का साथ देने का ऐलान किया।
भारत पर असर
इस संघर्ष से भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला खतरे में है। दो तेल टैंकरों पर हमलों में तीन भारतीय नाविक मारे गए। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। विदेश मंत्रालय ने ईरान में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वैश्विक तेल कीमतें 20% उछल चुकी हैं।
भविष्य की आशंका
ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियां रुकी हुई हैं। संघर्ष पांचवें दिन भी थमने का नाम नहीं ले रहा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यह युद्ध क्षेत्रीय स्तर से वैश्विक युद्ध में बदल सकता है।
Correspondent – Shanwaz Khan



