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दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं के लिए खुशखबरी: पीयर-टू-पीयर सोलर ट्रेडिंग से अब घर-घर सस्ती बिजली!

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नई दिल्ली, 13 फरवरी 2026: राजधानी दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है। दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) ने ‘पीयर-टू-पीयर (P2P) एनर्जी ट्रेडिंग’ पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। इस नई व्यवस्था के तहत लोग अपने सोलर पैनलों से उत्पादित अतिरिक्त बिजली को सीधे पड़ोसी या अन्य उपभोक्ताओं को खरीद-बेच सकेंगे। यह छह महीने की पायलट योजना बिजली बिल घटाने और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने का नया द्वार खोलेगी।

आसान शब्दों में समझें तो, जिन घरों या इमारतों पर सोलर पैनल लगे हैं और बिजली अधिक बन रही है, वे उसे ग्रिड या डिस्कॉम के बजाय सीधे जरूरतमंद उपभोक्ताओं को बेच सकेंगे। वहीं, जिन्हें ज्यादा बिजली चाहिए, वे बाजार भाव पर सस्ती दरों से खरीद सकेंगे। DERC के इस फैसले से नेट मीटरिंग सिस्टम को मजबूत बनाने के साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए ट्रांजेक्शन संभव होगा। योजना सीमित क्षेत्रों में शुरू होगी, जहां तकनीकी चुनौतियां, कानूनी ढांचा और उपभोक्ता प्रतिक्रिया का परीक्षण किया जाएगा।

बिजली सस्ती, कमाई का नया जरिया: इस प्रोजेक्ट से उपभोक्ताओं के बिजली बिल में 20-30% तक कमी आ सकती है। सोलर पैनल वाले घरों को अतिरिक्त आय का मौका मिलेगा, जबकि खरीदारों को पारंपरिक बिजली से सस्ती हरित ऊर्जा उपलब्ध होगी। पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे कार्बन उत्सर्जन घटेगा और दिल्ली का प्रदूषण स्तर कम होगा। दिल्ली सरकार पहले ही 2025 तक 4,000 मेगावाट सोलर क्षमता का लक्ष्य रख चुकी है, जिसमें नेट मीटरिंग ने हजारों उपभोक्ताओं को जोड़ा है। अब P2P ट्रेडिंग इस चेन को पूरा करेगी।

ऊर्जा क्षेत्र में नया युग: विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम केंद्र सरकार की रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी से मेल खाता है। यदि पायलट सफल रहा तो पूरे दिल्ली-एनसीआर में लागू हो सकता है, जिससे ऊर्जा वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी और डिस्कॉम पर निर्भरता घटीगी। ऊर्जा अर्थशास्त्री डॉ. अजय माथुर ने कहा, “यह उपभोक्ता-सशक्तिकरण का प्रतीक है, जो विकेंद्रीकृत ऊर्जा मॉडल को बढ़ावा देगा।” हालांकि, ब्लॉकचेन-आधारित ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की सुरक्षा और टैरिफ निर्धारण पर नजर रखी जाएगी।

कुल मिलाकर, यह प्रोजेक्ट दिल्ली को स्मार्ट सिटी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। उपभोक्ता अब न केवल बिजली बचाएंगे, बल्कि हरित क्रांति के साझेदार भी बनेंगे। DERC जल्द दिशानिर्देश जारी करेगा, जिससे योजना धरातल पर उतरेगी।

Correspondent Shanwaz Khan

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