लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले ब्राह्मण कार्ड फिर गरमाया हुआ है। समाजवादी पार्टी ने एक बड़ा दांव खेलते हुए विधानसभा में भगवान परशुराम जयंती पर सरकारी छुट्टी की मांग उठा दी। सपा विधायक कमाल अख्तर ने सदन में जोरदार तरीके से यह प्रस्ताव रखा, जिससे भाजपा सरकार पर दबाव बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन पड़ने वाली परशुराम जयंती पर राजकीय अवकाश घोषित किया जाए, ताकि ब्राह्मण समाज सहित सभी वर्ग अपने आराध्य का पूजन धूमधाम से कर सकें।
कमाल अख्तर ने सदन में स्पष्ट किया कि भगवान परशुराम विष्णु के छठे अवतार हैं और ब्राह्मणों के कुल गुरु माने जाते हैं। समाजवादी पार्टी की अखिलेश यादव सरकार ने इस दिन छुट्टी दी थी, लेकिन वर्तमान योगी आदित्यनाथ सरकार ने इसे निरस्त कर दिया। इससे न केवल ब्राह्मण समाज में बल्कि अन्य वर्गों में भी नाराजगी फैल गई है। विधायक ने तर्क दिया कि छुट्टी न होने से सरकारी कर्मचारी व्यक्तिगत अवकाश लेने को मजबूर होते हैं, जबकि व्यापारी अपने धंधे बंद कर पूजा-अर्चना में लीन होते हैं। उन्होंने मांग की कि इस वर्ष 19 अप्रैल को विशेष आदेश जारी हो, जिससे लोग बिना किसी परेशानी के उत्सव मना सकें।
इस मांग पर विधानसभा स्पीकर सतीश महाना ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सभी भगवान को सम्मान है, लेकिन यह राजनीतिक मुद्दा बन गया है। उन्होंने सपा विधायक को आश्वस्त किया कि सरकार इस पर विचार करेगी। सपा की यह चाल ब्राह्मण वोटबैंक को लुभाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है, जो यूपी में करीब 10 प्रतिशत आबादी रखता है। परंपरागत रूप से ब्राह्मण भाजपा के कोर वोटर रहे हैं, लेकिन हाल के शंकराचार्य विवाद और अन्य मुद्दों से उनकी नाराजगी बढ़ी है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव इस असंतोष को भुनाने में जुटे हैं और खुलेआम ब्राह्मण हितों की बात कर रहे हैं।
वहीं, भाजपा डैमेज कंट्रोल मोड में दिख रही है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने हाल ही में बटुक भगवानों को सम्मानित कर पार्टी की छवि सुधारने की कोशिश की। विशेषज्ञों का मानना है कि परशुराम जयंती पर छुट्टी का मुद्दा भाजपा के लिए चुनौती बन सकता है, खासकर जब पंजाब जैसे राज्य पहले ही छुट्टी घोषित कर चुके हैं। ब्राह्मण संगठनों ने भी मांग तेज कर दी है, जिसमें परशुराम जन्मोत्सव पर अवकाश के अलावा ब्राह्मण कल्याण बोर्ड और संस्कृत विश्वविद्यालय स्थापना शामिल है।
यह विवाद यूपी की सियासत को नई ऊंचाई दे रहा है। सपा की रणनीति से भाजपा को ब्राह्मणों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए नया प्लान बनाना पड़ सकता है। क्या योगी सरकार इस मांग को मान लेगी या फिर इसे खारिज कर सपा को और मजबूत कर देगी? आने वाले दिनों में इसका असर 2027 चुनाव पर दिखेगा। फिलहाल, सदन में यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
Correspondent – Shanwaz Khan



