महाराष्ट्र में एक बार फिर मंत्री और भाजपा नेता नितेश राणे अपने विवादित बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। वसई में महानगरपालिका चुनाव के प्रचार के दौरान दिए गए उनके भाषण ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। विपक्षी दलों ने उनके बयान को समाज में विभाजन पैदा करने वाला बताते हुए कड़ी आलोचना की है, जबकि सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए नितेश राणे ने कहा कि हिंदू समाज की ओर कोई भी गलत नजर से नहीं देख सकता और सरकार हिंदुत्ववादी सोच के साथ काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार, मुख्यमंत्री और आने वाला मेयर सभी हिंदुत्व की विचारधारा से प्रेरित होंगे। उनके इस बयान को समर्थकों ने उत्साह के साथ लिया, लेकिन विरोधियों ने इसे सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने वाला करार दिया।
अपने भाषण में नितेश राणे ने यह भी कहा कि शहर में वही नेतृत्व स्वीकार्य होगा जो धार्मिक पहचान के साथ मजबूती से खड़ा हो। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे एकजुट होकर ऐसे उम्मीदवार को चुनें जो उनके अनुसार हिंदू समाज का प्रतिनिधित्व करता हो। उनके शब्दों और भाषा को लेकर कई लोगों ने आपत्ति जताई और कहा कि इस तरह के बयान लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं।
यह पहली बार नहीं है जब नितेश राणे अपने बयानों के कारण विवादों में घिरे हों। इससे पहले भी वे ठाकरे परिवार और विपक्षी दलों पर तीखे और निजी हमले करते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि हिंदू समाज को सुरक्षित रखना उनकी प्राथमिकता है और महाराष्ट्र को हिंदू राष्ट्र की विचारधारा के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उनके इस बयान पर भी उस समय काफी हंगामा हुआ था।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि चुनाव के समय इस तरह की बयानबाजी से समाज में तनाव बढ़ता है और जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकता है। कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव गुट) और एनसीपी नेताओं ने नितेश राणे से अपने बयान पर माफी मांगने की मांग की है। वहीं, कुछ सामाजिक संगठनों ने चुनाव आयोग से भी इस मामले में संज्ञान लेने की अपील की है।
भाजपा की ओर से हालांकि इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि नितेश राणे ने यह बात राजनीतिक जोश में कही थी। बावजूद इसके, उनके बयान ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि महाराष्ट्र की राजनीति में चुनाव नजदीक आते ही बयानबाजी का स्तर लगातार तीखा होता जा रहा है। अब देखना होगा कि इस विवाद का आने वाले चुनावों पर क्या असर पड़ता है।
Correspondent – Shanwaz khan



