देश की राजनीति में एक बार फिर चुनाव आयोग (EC) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भूमिका को लेकर बड़ा सियासी विवाद खड़ा हो गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र की बीजेपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्षी दलों को दबाने और चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
ममता बनर्जी ने कोलकाता में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ही बीजेपी ने “सरकारी एजेंसियों के जरिए डराने-धमकाने की राजनीति” शुरू कर दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और ईडी जैसी संस्थाएं अब स्वतंत्र नहीं रहीं, बल्कि सत्ताधारी पार्टी के इशारों पर काम कर रही हैं।
ममता बनर्जी ने कहा,
“जब भी चुनाव आते हैं, ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स की टीमें विपक्षी नेताओं के पीछे लग जाती हैं। यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि सत्ता का दुरुपयोग है। बंगाल में बीजेपी चुनावी मैदान में जनता का सामना नहीं कर पा रही, इसलिए एजेंसियों के जरिए दबाव बनाया जा रहा है।”
वहीं दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। लखनऊ में मीडिया से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ही बीजेपी ने राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
अखिलेश यादव ने कहा,
“बीजेपी को जनता की नाराजगी साफ दिखाई दे रही है, इसलिए अब चुनाव आयोग और ईडी जैसी संस्थाओं को आगे कर दिया गया है। ये एजेंसियां अब निष्पक्ष नहीं रहीं। इनका इस्तेमाल केवल विपक्ष को डराने और बदनाम करने के लिए हो रहा है।”
अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश में लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किया जा रहा है और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएगी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी।
दोनों नेताओं के इन बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने भी ममता बनर्जी और अखिलेश यादव के सुर में सुर मिलाते हुए केंद्रीय एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों का कहना है कि यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों से लगातार देखा जा रहा है कि चुनावों से पहले विपक्षी नेताओं पर जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो जाती है।
वहीं बीजेपी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जांच एजेंसियां कानून के अनुसार काम करती हैं और किसी भी राजनीतिक दबाव में नहीं हैं। बीजेपी का दावा है कि विपक्षी नेता अपनी कथित विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए एजेंसियों पर सवाल उठा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे बंगाल और यूपी के चुनाव नजदीक आएंगे, इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप और तेज होंगे। एक तरफ विपक्ष इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहा है, तो दूसरी तरफ सत्ता पक्ष इसे कानून का पालन बता रहा है।
कुल मिलाकर, 2026 की शुरुआत में ही चुनावी राजनीति ने रफ्तार पकड़ ली है और आने वाले महीनों में यह टकराव और गहराने के आसार साफ नजर आ रहे हैं।
Bengal – Piyush Dhar Diwedi



