केंद्र की मोदी सरकार ने देश की लंबे समय से अटकी जनगणना को गति देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कैबिनेट ने राष्ट्रीय जनगणना और इससे जुड़ी तकनीकी व प्रशासनिक तैयारियों के लिए 11,718 करोड़ रुपये के विशाल बजट को हरी झंडी दे दी है। यह फैसला न केवल 14 वर्ष पुराने आंकड़ों को अपडेट करेगा, बल्कि कृषि, ग्रामीण विकास और सामाजिक योजनाओं को नई दिशा देगा। विशेषज्ञ इसे नीति निर्माण के लिए ‘गेम चेंजर’ बता रहे हैं।
क्यों जरूरी था यह बजट?
भारत की अंतिम जनगणना 2011 में हुई थी, जबकि 2021 वाली कोविड-19 महामारी के कारण कई बार टल चुकी है। अब सरकार आधुनिक तकनीक से सशक्त जनगणना की तैयारी में जुट गई है। बजट में डेटा संग्रह, डिजिटल उपकरण, कर्मचारियों का प्रशिक्षण, सर्वे टीमों का गठन, सुरक्षा व्यवस्था और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च शामिल है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “यह अब तक की सबसे व्यापक और डिजिटल जनगणना होगी। हर परिवार, हर वर्ग का डेटा मोबाइल ऐप के जरिए दर्ज होगा, जिससे सटीकता बढ़ेगी।”
किसानों के लिए खुशखबरी
इस जनगणना का सबसे बड़ा फायदा करोड़ों किसानों को होगा। इसमें कृषि डेटा को प्राथमिकता मिलेगी, जैसे:
- फसल पैटर्न और उत्पादकता,
- भूमि स्वामित्व व खेती योग्य जमीन,
- किसानों की आय और सिंचाई सुविधाएं,
- ग्रामीण रोजगार व कृषि श्रमिकों की स्थिति।
ये आंकड़े पीएम किसान सम्मान निधि, एमएसपी निर्धारण, फसल बीमा, कृषि ऋण और ग्रामीण विकास योजनाओं को मजबूत बनाएंगे। कृषि अर्थशास्त्री डॉ. अशोक गुलाटी ने कहा, “पुराने आंकड़ों से नीतियां अटक रही थीं। नए डेटा से लक्षित सहायता पहुंचेगी, जिससे किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य साकार होगा।” किसान संगठनों ने इसे स्वागतयोग्य बताते हुए कहा कि इससे ग्रामीण गरीबी और जल संकट जैसी समस्याओं का समाधान आसान होगा।
डिजिटल क्रांति का दौर
जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। सर्वेक्षक टैबलेट और ऐप इस्तेमाल करेंगे, जबकि नागरिक स्वयं मोबाइल पर डेटा अपडेट कर सकेंगे। इससे डेटा एकत्रण तेज, त्रुटियां न्यूनतम और विश्लेषण सरल होगा। गोपनीयता के लिए सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल भी होंगे।
अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव
ताजा आंकड़े शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, बुजुर्ग कल्याण और शहरीकरण जैसी योजनाओं को प्रभावित करेंगे। संसाधनों का बेहतर आवंटन संभव होगा, खासकर पिछड़े इलाकों में। आरक्षण, सीट वितरण और चुनावी सीमांकन भी अपडेट होंगे।
यह बजट भारत को डेटा-आधारित शासन की ओर ले जा रहा है। जनगणना से किसानों व आमजन को वास्तविक लाभ मिलेगा, जो विकास की नई गति सेट करेगा। तैयारियां तेज हो चुकी हैं, और जल्द ही देशव्यापी अभियान शुरू होगा।
| Correspondent – Shanwaz khan |



