भारतीय कुश्ती की सनसनी विनेश फोगाट ने अपने संन्यास के फैसले को पलट दिया है। पेरिस ओलंपिक 2024 में वजन घटाने के विवाद के बाद संन्यास लेने वाली विनेश अब मैट पर वापसी कर रही हैं। उनकी नजरें लॉस एंजिल्स में आयोजित होने वाले 2028 ओलंपिक पर टिकी हैं। इस खुशखबरी को विनेश ने खुद सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिससे फैंस में उत्साह की लहर दौड़ गई।
अगस्त 2024 में पेरिस ओलंपिक फाइनल से पहले वजन नापने में असफल रहने के बाद विनेश ने भावुक होकर संन्यास की घोषणा की थी। इसके बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखने का ऐलान भी किया। लेकिन अब, कुछ महीनों के अंतराल के बाद, वे कुश्ती के मैदान में लौटने को बेताब हैं। इंस्टाग्राम पर पोस्ट की गई एक लंबी नोट में विनेश ने अपनी मनोदशा खुलकर बयां की। उन्होंने लिखा, “लोग अक्सर मुझसे पूछते रहते हैं कि क्या पेरिस मेरी आखिरी यात्रा थी? लंबे समय से मेरे पास इसका जवाब नहीं था। कई सालों बाद पहली बार मैंने चैन की सांस ली। अपने कार्यभार को समझने के लिए थोड़ा समय लिया। जीवन के उतार-चढ़ाव, त्याग, वो रूप जो दुनिया ने कभी नहीं देखे।”

विनेश ने आगे कहा, “मुझे अभी भी खेल पसंद है। अभी भी प्रतिस्पर्धा करना चाहती हूं। सन्नाटे में मुझे वो चीज मिली जो मैं भूल गई थी – ‘आग कभी नहीं बुझती।’ ये सिर्फ थकावट और शोर के नीचे दबी हुई थी। अनुशासन, दिनचर्या, लड़ाई… ये मेरे सिस्टम का हिस्सा हैं। कितनी भी दूर चली जाऊं, मेरा एक हिस्सा मैट पर ही है। इसलिए मैं यहां हूं – निडर दिल और अटल इरादे के साथ LA28 की ओर कदम बढ़ा रही हूं।”
इस बार विनेश की यात्रा में उनका बेटा भी शामिल होगा, जो उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा बनेगा। उन्होंने लिखा, “इस बार मैं अकेली नहीं हूं। मेरा बेटा मेरी टीम में शामिल हो रहा है – मेरा छोटा चीयरलीडर, 2028 ओलंपिक की राह पर मेरी ताकत।” यह पोस्ट विनेश के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है, जो भारतीय खेलप्रेमियों के लिए प्रेरणा स्रोत है।
विनेश का करियर हमेशा चुनौतियों से भरा रहा है। राष्ट्रमंडल खेलों में दो स्वर्ण, एशियाई खेलों में रजत और कई विश्व चैंपियनशिप पदक जीत चुकीं वे भारत की पहली महिला पहलवान हैं, जिन्होंने ओलंपिक फाइनल में जगह बनाई। पेरिस में ब्रॉन्ज मेडल से चूकने के बाद उनकी वापसी भारतीय कुश्ती को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है। फैंस अब ट्रेनिंग सेशन और आने वाले टूर्नामेंट्स का इंतजार कर रहे हैं। विनेश की यह वापसी न सिर्फ व्यक्तिगत जीत है, बल्कि लाखों लड़कियों के लिए संघर्ष की मिसाल भी।
| Correspondent – Shanwaz khan |



