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नोएडा-गाजियाबाद में घुटने लगी सांस, हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंची; ठंड और प्रदूषण ने बढ़ाई मुश्किलें

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उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सर्दी के साथ हवा में घुलता प्रदूषण अब जानलेवा स्तर तक पहुंच गया है। राजधानी लखनऊ से लेकर नोएडा और गाजियाबाद तक, हर ओर हवा की गुणवत्ता में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। नवंबर के दूसरे पखवाड़े में ठंड बढ़ने के साथ वातावरण में धूल, धुआं और जहरीले कणों की मात्रा इतनी बढ़ गई है कि कई इलाकों में लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है।

गुरुवार, 20 नवंबर को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, नोएडा और गाजियाबाद का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गया। ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क-5 में सुबह एक्यूआई 445 दर्ज किया गया, जो कि सांस और दिल से जुड़ी बीमारियों के लिए बेहद ख़तरनाक स्तर है। नोएडा सेक्टर-116 में 443, सेक्टर-एक में 428 और सेक्टर-62 में 416 एक्यूआई रिकॉर्ड किया गया।

गाजियाबाद में भी बिगड़ा हाल, हवा ‘जहरीली’

दिल्ली से सटे गाजियाबाद में भी हालात कम चिंताजनक नहीं हैं। शहर के लोनी क्षेत्र में एक्यूआई 432, इंदिरापुरम में 427, संजय नगर में 420 और वसुंधरा में 429 दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल क्षेत्र में हवा की गति बेहद धीमी है, जिससे प्रदूषक तत्व नीचे ही ठहर जा रहे हैं और लोगों को राहत नहीं मिल रही।

हापुड़ में एक्यूआई 365, बागपत में 382 और मेरठ में 332 रहा, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि 400 से ऊपर पहुंचा एक्यूआई गंभीर स्वास्थ्य संकट का संकेत है। इस स्तर पर स्वस्थ व्यक्ति को भी सांस लेने में तकलीफ हो सकती है, जबकि बुजुर्गों, बच्चों और अस्थमा के रोगियों के लिए स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है।

ठंड, धुंध और कोहरे ने बढ़ाई परेशानी

मौसम विभाग ने आगे ठंड और कोहरे में और इजाफे की चेतावनी दी है। सुबह और शाम के समय तापमान गिरने से हवा और अधिक घनी हो जाती है, जिससे प्रदूषक कण जमीन के करीब मंडराते रहते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है, जब तक कि ठंडी हवाएं नहीं चलने लगतीं या बारिश नहीं होती।

प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि अत्यधिक प्रदूषित इलाकों में सुबह की सैर और बाहर के खेल-कूद से परहेज करें। जरूरत पड़ने पर मास्क का प्रयोग करें और घरों में एयर प्यूरिफायर या इनडोर पौधों का इस्तेमाल करें ताकि जहरीली हवा के असर को कम किया जा सके।

Correspondent – Shanwaz Khan

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