नई दिल्ली/शिमला, 13 फरवरी 2026: हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य कांग्रेस सरकार को झटका दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने शुक्रवार को स्पष्ट आदेश जारी किए कि 31 मई 2026 से पहले हर हाल में पंचायत चुनाव कराने होंगे। पुनर्सीमांकन (डिलिमिटेशन) के नाम पर संवैधानिक संस्थाओं के चुनाव को टालने की कोई गुंजाइश नहीं है।
यह फैसला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के 30 अप्रैल से पहले चुनाव कराने के निर्देश के खिलाफ राज्य सरकार की स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) पर आया। हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया था, जिसे सरकार ने चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित नहीं किया जा सकता।
सरकार की दलीलें फेल: राज्य सरकार ने SLP में तर्क दिया कि हाल की भारी बारिश और प्राकृतिक आपदा से प्रदेश में व्यापक तबाही हुई है। कई इलाकों में सड़कें, पुल और बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त है, जिसका मरम्मत कार्य जारी है। सरकार ने आपदा प्रबंधन अधिनियम (2005) का हवाला देते हुए कहा कि यह संसद का कानून है, जो राज्य के पंचायती राज कानून पर प्राथमिकता रखता है। ऐसे में चुनावी तैयारियां संभव नहीं। लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया, बल्कि समयबद्ध चुनाव पर जोर दिया।
राजनीतिक प्रभाव: यह फैसला हिमाचल की कांग्रेस सरकार के लिए चुनौती है, जो पिछले साल सत्ता में आई। विपक्ष भाजपा ने इसे सरकार की नाकामी बताया। पूर्व सीएम जयराम ठाकुर ने कहा, “लोकतंत्र की हत्या बंद हो। पंचायतें ग्रामीण विकास की रीढ़ हैं।” चुनाव आयोग को भी निर्देश मिला है कि प्रक्रिया तेज करें। हिमाचल में 3,243 पंचायतें हैं, जिनके 27,000 से अधिक वार्डों पर सीटें आरक्षित हैं।
विशेषज्ञ मत: संवैधानिक विशेषज्ञ डॉ. एके सिंह ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने 73वें संशोधन की भावना को मजबूत किया। आपदा कोई बहाना नहीं।” यदि समय पर चुनाव नहीं हुए तो contempt of court का खतरा। सरकार अब निर्वाचन तिथि घोषित करने की तैयारी में है। यह मामला अन्य राज्यों के लिए मिसाल बनेगा।
Correspondent Shanwaz Khan



